मुहब्बत की बात यहाँ हराम होगी
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निज़ाम साहब कि नई मुनादी होगी
ख़्वाब देखनें पर यहाँ पाबंदी होगी
हाथ पकड़ चलने वाले बाग़ी होंगे
मुहब्बत की बात यहाँ हराम होगी
नहीं बख़्शे जायेंगे जलसा करने वाले
फाँसी उन सबको सरे आम होगी
मिलेगी उनको भी सजाएँ बराबर की
जिनके दिल में अमन की आस होगी
वे सब पकड़े जायेंगे शरीके जुर्म में
जिनकी जेब से क़लम बरामद होगी
हर घर की तलाशी का हुक्म होगा
अब हर शख्स से किताबें ज़ब्त होंगी
हर घर की तलाशी का हुक्म होगा
अब हर शख्स से किताबें ज़ब्त होंगी
जो कहीं लगाएँगे भाईचारे के नारे
मुश्कें कस के उनकी ठुकाई होगी
हर शख्स वो ज़िला बदर होगा
किसी ग़ैर के घर की आग बुझाई होगी
☘ ज स बी र चा व ला
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