Saturday, June 4, 2016

शास्त्रार्थ में गार्गी

शास्त्रार्थ में गार्गी 
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गार्गी बोलो मत
गार्गी सोचो मत
गार्गी तर्क मत करो 
सुनो गार्गी सिर्फ सुनो
बस चुप रहो
भरी सभा में याज्ञवल्क्य ने धमकाया
सिर फट जायेगा तुम्हारा 
याज्ञवल्क्य ठहरे पुरुष
पितृसत्तात्मकता के प्रतीक 

उठो गार्गी उठो
ऋषि परंपरा छोड़ो
क़लम को बनाओ हथोड़ा 
सनातन बेड़ियाँ तोड़ो

☘️ जसबीर चावला 

दादरी में बीफ

दादरी में बीफ
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उन्हें पहले ही पता था
   फ्रिज में क्या था
  न बीफ न मटन था

      आदमबो थी
   खुद अख़लाक़ था

🌿 जसबीर चावला