Wednesday, April 26, 2017

कड़ी निंदा

कड़ी निंदा
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हम हमले की 'कड़ी' निंदा करते हैं 

रसोई से आवाज आई
टीवी बयान हो चुका  
अंदर आओ

आज 'कढ़ी' बनी है 

Thursday, April 20, 2017

मशाल जलती रहेगी

मशाल जलती रहेगी
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मशाल खान उन्मादी भीड द्वारा मारा गया
सुपुर्द-ए-खाक हो गया
क्या मशाल मर गया
मशाल खान मरते नहीं
फिर कोई और आयेगा 
बेखौफ मशाल जलायेगा
मशाल बुझेगी नहीं

☘ ज स बी र  चा व ला
(मशाल खान यूसुफ़जई उन्मादी भीड द्वारा मारा गया)

Friday, April 14, 2017

क्यों बदल गई कविता

क्यों बदल गई कविता
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क्यों झील सी आँखों में डूबती नहीं
गालों के तिल पर अटकती नहीं 
क्यों नहीं अधरों जुल्फों में उलझती
नहीं टाँकती जूड़े मे फूल
सहज प्रेम करना भूली
क्या बदल गई कविता ?
 
हाँ बदल गई कविता 
कविता गुस्सा,गुबार,उलाहना बनी है 
पाखँड की परतें उघेड़ रही 
ताल ठोंक सरकार के खिलाफ खड़ी 
व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करती उठी उँगली है
भिड़ने को तैयार है कविता
सशक्त गालियाँ हैं कविता 

जब पेलेटगन अपना स्वभाव बदलेगी
लाठियाँ नहीं बरसेंगी 
छर्रे चलेंगे नहीं रंग बरसेंगे
पत्थर नहीं फूल बरसेंगे
कविता फिर प्रेम करेगी 
फिर से प्रेम गीत रचेगी

Monday, April 10, 2017

हवाओं पर प्रेतों का क़ब्ज़ा है

हवाओं पर प्रेतों का क़ब्ज़ा है
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हवाओं में गहरी साजिश है
एक थमती नहीं कि दूसरी आँधी बन आती 
छोड़ जाती पीछे जली बस्तियों की गँध
पिंड बने शरीरों की गँध         
कब बवँडर बन जायें हवाएँ
बस्तियाँ वीरान कर जायेँ

खास दिशा से आ रही गर्म हवा
हवाओं पर प्रेतों का क़ब्ज़ा है
चाहे जब खराब कर दें ज़मानें की हवा

कब तक चलेंगी प्रेत हवाएँ  ?


☘ ज स बी र   चा व ला













गौमाता संग सफर

गौमाता संग सफर
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अर्थशास्त्र की खुली गलियों से गाय निकली
धर्म की तंग गलियों में घुसी
संविधान के पन्ने चबाती सँसद पहुँचीं
रँभाई
गोबर कर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया
जँभाई लेते कुछ साँसदों पर गोमूत्र के छींटे पड़े 
पवित्र हुए
राज्य सभा कि दर्शक दीर्घा में पहुँची
जुगाली की
सर्वोच्च न्यायालय की मुँडेर चढ़ी 
लालक़िले से राष्ट्र को संबोधित किया
रुआँसी भारतमाता लाईन में खडी थी
कौन माता बड़ी थी
कौए भूल गये अपनी 'काँव काँव' 
चिल्लाये 'काउ काउ'

सपना 'आउट आफ कन्ट्रोल' हो रहा था
रोका कट कट 
माता के संग सेल्फी ले ली फटाफट

जै गोमाता दी

☘ जसबीर चावला  

Friday, April 7, 2017

हिटलर नहीं मरते

हिटलर नहीं मरते
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हिटलर नहीं मरते 
पुन: पुन:लौट आते हैं 
नये कलेवर में नाजी विचारों के साथ

गोयबल्स भी नहीं मरते 
जब तक हिटलर रहेंगे
गोयबल्स भी रहेंगे 
कभी मीडिया के भेष में 
कभी धर्म के चोले में 
झूठ बार बार दुहराएँगे 
उसे ही अंतिम सच बताएँगे 
हिटलर कभी नहीं मरते

☘ जसबीर चावला