Friday, October 5, 2018

नोटबंदी : आखिर में फिर भी बड़े नोट बच जायें तो क्या करें


नोटबंदी : आखिर में फिर भी बड़े नोट बच जायें तो क्या करें
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1️⃣ घर के सारे बच्चों को कैंची दें.उनसे नोटों के छोटे टुकड़े करवा लें.इससे बच्चों को काम की आदत पडेगी.इन टुकड़ों को सीमेंट में मिलाकर ईंटें बना कर मकान में लगायें.पूरा पैसा प्रापर्टी में खप जायेगा,कानों कान किसी को खबर नहीं होगी.मकान की कीमत करोड़ों रुपये बढ जायेगी.

2️⃣ मकान में इंटियर करवाना है.दीवार पर फेविकौल लगायें और पाँच सो,हजार के नोट 'वाल पेपर' की जगह दीवार घर के सारे लोग मिलकर चिपकायें.घर के साथ अटूट बॉन्डिंग बनी रहेगी.सावधान नोट के नंबर पहले सफाई से कट कर दें.परिवार सहित इस दीवार के सामने फोटो खिचवायें और सोशल मिडीया पर डालें.साख बढ़ेगी.बच्चों के रिश्ते अमीर घरों से आयेंगे.नोटों की पूरी वसूली हो जायेगी.

3️⃣ नोटों को तंदूर में जला कर राख कर लें.चांदी सोनें के तावीज़ बनवाकर उनमें राख भर दें.परिवार के सभी सदस्यों को बाँध दें.कोई भूत प्रेत नजदीक नहीं आयेगा.नोट अपने पास ही हैं यह एहसास बना रहेगा.

4️⃣ नोटों की राख अभिनेता मनोजकुमार उर्फ़ भारतकुमार के माध्यम से तावीजों में भरकर बिकवायें.पाँच सौ की राख वाला तावीज़ तीन हजार में,एक हजार की राख वाला पाँच हजार रुपये में चमत्कारी तावीज़ के रूप में बिक जायेगा.प्रचारित कर दें कि इस तावीज़ को पहनने से 'लक्ष्मी की कृपा' बरसेगी.

5️⃣ श्रीश्री रविशंकर,शातिर सेठ बाबा रामदेव,आसाराम आदि से सम्पर्क करें जो सिद्ध मकरध्वज जैसी औषधियों में स्वर्ण भस्म डालनें का दावा करते हैं.वे यह राख इनमें मिलाकर ये दावा कर सकते हैं कि 'असली पाँच सौ हजार रुपये के नोटों की राख युक्त च्यवनप्राश'.इसे खाकर लोग अपने आप को अंबानी जैसा धन्नासेठ समझेंगे.
6️⃣ अधिक शोकग्रस्त हों तो राख को हरिद्वार ले जाकर विधी विधान से गंगा में प्रवाहित करें.ब्रम्हभोज करें.नोटों और आपकी आत्मा को शांति मिलेगी.
7️⃣ टायलेट पेपर समाप्त हो गया हो तो इससे काम चलाएँ.
 और रचनात्मक सुझावों के लिये सम्पर्क करें.

                               आप सबका शुभचिंतक😜 - जसबीर चावला

मोर मोरनी जज और आँसू भरी हैं ये जीवन की राहैं

 मोर मोरनी जज और आँसू भरी हैं ये जीवन की राहैं
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निर्माणाधीन फिल्म "मोर मोरनी जज और आँसू" का सेट तैयार है.जंगल में रात का सीन है.डायरेक्टर की आवाज-"सायलेंस" सेट पर शांति छा जाती है.'केमरा आन'.केमरा शूट करनें लगता है.

🌓 जंगल में ढेरों कुँआरे कुँआरी मोर मोरनियाँ आ जाते हैं.नृत्य शुरु.मोरनियाँ समवेत स्वरों में गाती हैं-"मोरनी बागाँ में नाचे आधी रात को" जवाब में एक मोर गाता है-"ये आँसू मेरे दिल की ज़ुबान हैं".एक मोरनी दौड़ कर उसके आँसू पीना चाहती है.
🌓 यहीं से ही कहानी में जबरदस्त ट्विस्ट."एक आदमी" दौड़ कर मोरों और मोरनियों के बीच काँच की मोटी दीवार खींच देता है.मोर एक तरफ मोरनियाँ दूसरे तरफ.(सस्पेंस म्युजिक) काँच पर दोनों तरफ लिखता है -"शर्म की दीवार".तभी विलेन कौआ आ जाता है और दीवार पर "शर्म" की जगह "शर्मा"कर देता है.अब लिखा है-"शर्मा की दीवार". दूसरा कौआ मोरों को कागज पर लिखा जंगल की हायकोर्ट  का फैसला बताता है कि मोर मोरनियाँ खुले आम मिल नहीं सकते.
🌓 प्रेम की मारी मोरनियाँ एक तरफ दूसरी तरफ कामातुर मोर बीच में काँच की दीवार.एक मोर गाता है-"आँसू भरी हैं ये जीवन की राहें".दूसरा मोर-"आज तो आँसू भर आये मुद्दतें हुई हैं मुस्कुराये".दोनों रोते हैं.मोरनियां काँच की दीवार पर विव्हल भाव से चोंच मारती- तडफती हैं.दूसरी तरफ मोर आँसू दीवार पर बहाते हैं.सर पटकते हैं.बेचारे बेबस हैं.(यह फिल्म का बड़ा इमोशनल सीन है,हाल में सबके "आँसू" निकल आयेंगे पर आपके इन आँखों से मोरनियाँ प्रेगनेंट नहीं हो सकती. 😪😀) 
🌓 एक मोरनी अपने प्रेमी मोर को गुलाम अली की गजल का उलाहना देती है कि जब मैं मायके गई थी तब मेरी गैर हा़जरी में तो तुम-"चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है" खूब सुना करते थे अब कहाँ गये तुम्हारे आँसू ? मोर मोरनियाँ काँच की दीवार के दोनों और उदास हैं.बेचारे न मिल सकते न कुछ कर सकते.एक मोरनी गाती है-"मेरी याद में तुम न आँसू बहाना मुझे भूल जाना" 
🌓 दूसरी सुशिक्षित मोरनी ऊंचे दर्जे का शेर पढ़ती है 
"एक उम्र से हूँ लज्जत-ए-गिरिया से भी महरूम
ए   राहत-ए-जाँ  मुझको  रुलानें   के  लिये आ
(दुख,आँसूओं के स्वाद से भी मैं वंचित हूँ जीवन की शांति रुला दे आकर)
🌓 सेट पर धीरे धीरे अँधेरा होता है.सीन पूरा हुआ.डायरेक्टर -"ओके" पेकअप'. कल अगला सीन "हायकोर्ट" पर फ़िल्माया जायेगा.

☘ डायरेक्टर -जसबीर चावला

🌑मोरनी माँ क्यों न बन सकी ?
😀क्योंकि मोर रोया न था !

🌑मोरनी ने फिर कौनसा गाना गाया ?
😀"तेरी आँख के आँसू पी जाऊँ ऐसी ये मेरी तक़दीर कहाँ"

बच्चा माँ से
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"पापा के आँसू क्यों निकल रहे हैं क्या हमारे यहाँ बेबी आयेगा.मोर के बेबी पर तो "शर्मा-थ्योरी" में ऐसा ही बतलाया है"
माँ-"चुप कर बहुत बोलता है.वो तो जज हैं,वे ऐसा कह सकते हैं.तू स्कूल में अपनी मेम से पूछ लेना" 😜

👻दिल माँगे मोर

(जयपुर हायकोर्ट के जज महेशजी शर्मा के श्री चरणों में समर्पित,जिनके अनुसार मोर आजीवन ब्रम्हचारी रहता है और मोरनी उसके आँसू पीकर गर्भवती हो जाती है)

अखबारों में क्लायमेंट चेंज

अखबारों में क्लायमेंट चेंज
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अबके 'पर्यावरण दिवस' खूब गरजा
आँकड़ों की बारिश हुई
विज्ञापन की नदियाँ बहीं
हरे भरे हो गये अखबार 
भाषणों की बाढ़ आई
ग्लोबल वार्मिंग की चिंता ने तटबंध तोड़ दिये

अखबारी कागज की भूख बड़ी
कुछ और पेड़ पूर्ति हेतु बलि चढ़े

☘ ज स बी र   चा व ला 

कठुआ की अबोध अफिसा

कठुआ की अबोध अफिसा
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आठ साल की अबोध अफिसा
उनके लिये मादा थी
बड़ा मुद्दा भी
एक सोचा समझा विचार थी
तयशुदा एजेंडा थी
मंदिर में मिल कर उड़ानें की दावत थी
बलात्कार किया
उत्पीड़ित कर मारी गई 

मर कर कुटिल राजनीति का मोहरा बनी
सांप्रदायिकता की बिसात पर और पिटेगी 

☘ जसबीर चावला 

Thursday, October 4, 2018

आदमी और मशीन

 आदमी और मशीन
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आदमी मशीन बनाता है
मशीन के साथ मिलकर रोबोट बनाता है
रोबोट मशीन आपस में मिल जाते हैं
आदमी बेदख़ल हो जाता है