कठुआ की अबोध अफिसा
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उनके लिये मादा थी
बड़ा मुद्दा भी
एक सोचा समझा विचार थी
तयशुदा एजेंडा थी
मंदिर में मिल कर उड़ानें की दावत थी
बलात्कार किया
उत्पीड़ित कर मारी गई
मर कर कुटिल राजनीति का मोहरा बनी
सांप्रदायिकता की बिसात पर और पिटेगी
☘ जसबीर चावला
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