मोर मोरनी जज और आँसू भरी हैं ये जीवन की राहैं
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निर्माणाधीन फिल्म "मोर मोरनी जज और आँसू" का सेट तैयार है.जंगल में रात का सीन है.डायरेक्टर की आवाज-"सायलेंस" सेट पर शांति छा जाती है.'केमरा आन'.केमरा शूट करनें लगता है.
🌓 जंगल में ढेरों कुँआरे कुँआरी मोर मोरनियाँ आ जाते हैं.नृत्य शुरु.मोरनियाँ समवेत स्वरों में गाती हैं-"मोरनी बागाँ में नाचे आधी रात को" जवाब में एक मोर गाता है-"ये आँसू मेरे दिल की ज़ुबान हैं".एक मोरनी दौड़ कर उसके आँसू पीना चाहती है.
🌓 यहीं से ही कहानी में जबरदस्त ट्विस्ट."एक आदमी" दौड़ कर मोरों और मोरनियों के बीच काँच की मोटी दीवार खींच देता है.मोर एक तरफ मोरनियाँ दूसरे तरफ.(सस्पेंस म्युजिक) काँच पर दोनों तरफ लिखता है -"शर्म की दीवार".तभी विलेन कौआ आ जाता है और दीवार पर "शर्म" की जगह "शर्मा"कर देता है.अब लिखा है-"शर्मा की दीवार". दूसरा कौआ मोरों को कागज पर लिखा जंगल की हायकोर्ट का फैसला बताता है कि मोर मोरनियाँ खुले आम मिल नहीं सकते.
🌓 प्रेम की मारी मोरनियाँ एक तरफ दूसरी तरफ कामातुर मोर बीच में काँच की दीवार.एक मोर गाता है-"आँसू भरी हैं ये जीवन की राहें".दूसरा मोर-"आज तो आँसू भर आये मुद्दतें हुई हैं मुस्कुराये".दोनों रोते हैं.मोरनियां काँच की दीवार पर विव्हल भाव से चोंच मारती- तडफती हैं.दूसरी तरफ मोर आँसू दीवार पर बहाते हैं.सर पटकते हैं.बेचारे बेबस हैं.(यह फिल्म का बड़ा इमोशनल सीन है,हाल में सबके "आँसू" निकल आयेंगे पर आपके इन आँखों से मोरनियाँ प्रेगनेंट नहीं हो सकती. 😪😀)
🌓 एक मोरनी अपने प्रेमी मोर को गुलाम अली की गजल का उलाहना देती है कि जब मैं मायके गई थी तब मेरी गैर हा़जरी में तो तुम-"चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है" खूब सुना करते थे अब कहाँ गये तुम्हारे आँसू ? मोर मोरनियाँ काँच की दीवार के दोनों और उदास हैं.बेचारे न मिल सकते न कुछ कर सकते.एक मोरनी गाती है-"मेरी याद में तुम न आँसू बहाना मुझे भूल जाना"
🌓 दूसरी सुशिक्षित मोरनी ऊंचे दर्जे का शेर पढ़ती है
"एक उम्र से हूँ लज्जत-ए-गिरिया से भी महरूम
ए राहत-ए-जाँ मुझको रुलानें के लिये आ
(दुख,आँसूओं के स्वाद से भी मैं वंचित हूँ जीवन की शांति रुला दे आकर)
🌓 सेट पर धीरे धीरे अँधेरा होता है.सीन पूरा हुआ.डायरेक्टर -"ओके" पेकअप'. कल अगला सीन "हायकोर्ट" पर फ़िल्माया जायेगा.
☘ डायरेक्टर -जसबीर चावला
🌑मोरनी माँ क्यों न बन सकी ?
😀क्योंकि मोर रोया न था !
🌑मोरनी ने फिर कौनसा गाना गाया ?
😀"तेरी आँख के आँसू पी जाऊँ ऐसी ये मेरी तक़दीर कहाँ"
बच्चा माँ से
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"पापा के आँसू क्यों निकल रहे हैं क्या हमारे यहाँ बेबी आयेगा.मोर के बेबी पर तो "शर्मा-थ्योरी" में ऐसा ही बतलाया है"
माँ-"चुप कर बहुत बोलता है.वो तो जज हैं,वे ऐसा कह सकते हैं.तू स्कूल में अपनी मेम से पूछ लेना" 😜
👻दिल माँगे मोर
(जयपुर हायकोर्ट के जज महेशजी शर्मा के श्री चरणों में समर्पित,जिनके अनुसार मोर आजीवन ब्रम्हचारी रहता है और मोरनी उसके आँसू पीकर गर्भवती हो जाती है)
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