Tuesday, January 21, 2014

लघु कथा 4 : एक होने वाले रिश्ते का दुखांत

लघुकथा 4 : होने वाले रिश्ते का दुखांत
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उन्हें अपने सुशील लड़के के विवाह के लिये सुघड़ लड़की की तलाश थी.एक रिश्ता आया जो  उन्हें और सारे परिवार को पसंद आया.लड़की बेंगलोर में साफ्टवेयर ईंजिनियर थी.लड़का पुणे में जाॅब करता था.

दो सप्ताह बाद दोनों पक्षों ने मुंबई में मिलकर एक दूसरे की देखा-देखी करने का तय किया.

लड़का होशियार था.उसने "अ" नाम के प्रायवेट डिटेक्टिव की सेवाएँ ली.वह जानना चाहता था का लड़की ऐसी वैसी तो नहीं है."अ" जासूस को विशेष रूप से कहा कि वह पता करें कि लड़की का कोई ब्वाय फ़्रेंड तो नहीं.वह किसी नाइट क्लब की मेंबर तो नहीं है.बंगलोर की किसी रेव पार्टी में शामिल तो नहीं.ड्रिंक्स-ड्रग्स लेती है क्या.

एक सप्ताह में डिटेक्टिव "अ" की रिपोर्ट आ गई.रिपोर्ट सकारात्मक थी.लड़की में कोई अवगुण नहीं था बल्कि उसमें और भी कई कलात्मक रुचिया थी.

लड़का परिवार ख़ुश था.अगले सप्ताह मंुबई की तैयारी में जुट गया.होने वाली बहू के लिये ज़ेवर साड़ी भी ख़रीद ली.

मुंबई रवाना होनें के एक दिन पूर्व उन्हें"ब" डिटेक्टिव की एक भारी भरकम रिपोर्ट मिली ,जिसे लड़की ने लड़के की जानकारी जुटाने को कहा था.

रिपोर्ट में कई गर्ल फ़्रेंड के साथ लड़के के फ़ोटो,ड्रग्स और ड्रिंक्स लेते फ़ोटो और पुणे में पुलिस की रेव पार्टी की रेड के समाचार पत्र की कटिंग एवं फ़ोटो थी जिसमें लड़का भी गिरफ़्तार हुआ था.

ज़ाहिर है मुंबई जाना निरस्त हो गया और 'बहू'के लिये लाये ज़ेवर साड़ी मिठाइयों परफ़्यूम धरे के धरे रह गये.




लघु कथा 3 : सूखा चारा और श्वेत क्रांति

सूखा चारा और श्वेत क्रांति 
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बिहार का कैमूर सिटी ग्रीन सिटी बन गया.वहाँ भवनों को भी हरे रंग से पेंट किया गया ताकि हरियाली नज़र आये.पेड़ हों या न हों पर शहर सावन के अंधे को ही नहीं,सबको सदा हरा भरा नज़र आयेगा.

प्रांत के पशु पालन मंत्री के समझदार पुत्र को इससे एक मौलिक रचनात्मक ख़्याल आया.पिता से बोला-"अपने प्रांत की गाय भैंसे इन दिनों दूध कम दें रही हैं.कारण सूखा चारा.अगर घास हरी हो तो दूध का उत्पादन बढ़ जायेगा.दूध की ‘श्वेत क्रांति’ में  'हरित क्रांति’ हो सकती है".

"पर समस्या है कि इन दिनों हरी घास मिलना मुश्किल है.हम एक काम कर सकते हैं,हम गाय भैंसों की आँखों पर प्लास्टिक के हरे चश्मे चढ़ा देते हैं,उन्हें सूखी घास हरी नज़र आयेगी,वे हरी समझ कर खाएंगी,दूध ज़्यादा देंगी - देश में फिर से दूध की नदियाँ बहेंगी"

पिता ने अपने होनहार लाल की अद्भुत समझ पर हँसकर उसे माँ  यशोदा के समान गले से लगा लिया.सचिव से कहा कि गाय भैंसों के लिये चश्मों का टेंडर कॉल करें और शाम को प्रेस कान्फरेंस का आयोजन करें ताकि लोग इस महान खोज के बारे में जान सकें.

लघु कथा 2 : कंबल कथा

कंबल कथा
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रात का वक़्त था.बाहर बड़ी ठंड थी.पति पत्नि कार में जा रहे थे.सड़क किनारे पतली पुरानी चादर में लिपटे एक बूढ़े भिखारी को देख पत्नि का दिल द्रवित हो गया. पति से कहा कि वह बूढ़ा ठंड से काँप रहा है,कार रोको.पति ने कार रोक दी.पत्नि बोली कार में जो कंबल पड़ा है उसे दें देते हैं.पति बोला-"क्या कहती हो.इतना मंहगा कंबल,वह उसे बेच देगा.ये ऐसे ही होते हैं".पत्नि न मानी.अनमने पति नें कंबल उठाया और ले जाकर बूढ़े को ओढ़ा दिया-"ले बाबा ऐश कर"

अगले दिन दिन में भी ग़ज़ब की ठंड थी.पति पत्नि उसी रास्ते से निकले. सोचा देखें रात वाले बूढ़े का क्या हाल है. देखा तो बूढ़े भिखारी के पास वह कंबल नहीं था. वही पुरानी चादर ओढ़े भीख मांग रहा था.पति ने पत्नि से कहा -"मैंने कहा था कि उसे मत दो बेच दिया होगा". दोनों कार से उतर कर उसके पास गये.पति ने व्यंग्य से पूछा- "बाबा रात वाला कंबल कहाँ हैं बेच कर नशे का सामान ले आये क्या ?

बूढ़े ने हाथ से इशारा किया थोड़ी दूरी पर एक बूढ़ी औरत भीख मांग रही थी. कंबल उसने ओढ़ा हुआ था.बूढ़ा बोला-"वह औरत पैरों से विकलांग है, मेरे पास तो पुरानी चादर है,मैंने कंबल उसे दें दिया "

पति पत्नि हतप्रभ रह गये, फिर धीरे से पति नें पत्नि से कहा-"घर से एक कंबल लाकर बूढ़े को दें देते हैं"

Saturday, January 18, 2014

बेटी बेटे

बेटी बेटे
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उन्होंने बेटियों को
बेटों  समान पाला
           *
किसी बेटे को नहीं
बेटी  समान  पाला

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स्टार शेफ़

स्टार शेफ़
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फ़ाईव स्टार शेफ़
पत्नि के खाने में
सदा मीन मेख
          *
झल्लाई पत्नि
बना लो आप
वे चीखे शेफ़ हूँ
पैसे देगा बाप

Friday, January 17, 2014

समुद्र मंथन तब

समुद्र मंथन तब
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अंततःअसुरों की हार हुई जो तय थी
अमरत्व के झाँसे छले गये 
रणनीतिक साझेदार विष्णु कच्छप बने 
वासुकि नाग रस्सी बना
मन्दराचल पर्वत मथानी बना 
घोर गर्जन में चौदह रत्न निकलना तय था
कामधेनु को ऋषि 
रावत को इन्द्र ले गये 
विष्णु को वरा लक्ष्मी ने
रंभा अप्सरा देवताओं को रिझाने गई इन्दर सभा 
बाक़ी रत्नों का भी ‘देव न्याय’ हुआ
अमृतघट ताकत से असुरों के हाथ लगा 
देवता बेचारे हताश हुए
भगवान मोहनी बन सामने आये
असुरों को फुसलाया नैन बाण चलाये 
छल से सोमरस पिला मदहोश किया
चालाक राहू अमृत पाँत में बैठा 
कंठ से अमृत न उतार पाया
भगवान का 'सुदर्शनचक्र' चला
धड़ से सिर कटवा बैठा
अब राहू केतु बन आकाश के किसी कोने में पड़ा है

प्रभु तेरी लीला अपंरम्पार
तेरी माया तू ही जानें 
हम मूरख क्या जानें

🦉 जसबीर चावला 

Monday, January 13, 2014

मंत्री बोला महलों में भी मौत आती है

मंत्री बोला महलों में भी लोग मरते हैं
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मंत्री के बोलने से सत्य उजागर हुआ
लोग मरते है कैंप में ही नहीं महलों में भी 
दिव्य ज्ञान मिला

पच्चिस सौ साल पहले
तथागत ने बच्चों को जवान होते देखा
बूढ़ा होकर मरते देखा
राजपाट त्यागा
सोई यशोधरा को महलों में छोड़ा
चल पड़े सत्य की तलाश में
'बुद्ध' कहलाए
हर कहीं आनी है मौत
मंत्रीजी कुछ दिन कैंप में रहो
अपने राजवंश के साथ रहो
खुले आसमान के नीचे
पहनों ख़ैरात के कपड़े 
जियो इमदाद के साथ
टपकते पानी ठँड में रहो
सबके सामने रोओ गिड़गिड़ाओ 
रहम की भीख माँगो
बे पर्दा होने दो अपनी ज़ीनत को
बिना इलाज दवाई के मर जाओ एक दिन 
मरना तो अटल सत्य है
'मौत तो हर जगह आती है'
महलों में भी कैंप में भी

* मुज्जफरनगर दंगो में राहत केम्पस् में अपर्याप्त सुविधाओं के कारण लोगों की हो रही मौतों पर मंत्री ने बयान दिया कि लोग महलों में भी मरते हैं.