Saturday, October 31, 2015

ये लड़कियाँ क़स्बे की

ये लड़कियाँ क़स्बे की
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ऊन के फँदे डालती
गाँठ लगाती
सपनों को बुनती उधेड़ती 
मंद मुस्कुराती
किताबों में फूल भूल जाती
ये लड़कियाँ क़स्बे की
*
रस्सी का फँदा बनाती 
गाँठ लगाती 
घर की इज़्ज़त बचाती 
खुशी खुशी 
झट फाँसी पर झूल जाती 
ये लड़कियाँ क़स्बे की

🌿   जसबीर चावला 


Thursday, October 29, 2015

युद्ध की मानसिकता

 युद्ध की मानसिकता
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देश में युद्ध चल रहा 'इन दिनों'

दनादन दगते कटाक्ष के गोले 
शब्दों के ज़हर बुझे तीर 
तुरही नाद नगाड़े जय घोष
देश कुरुक्षेत्र बना
देश में हाँका पड़ा 
सतत महाभारत घट रहा 
युद्धोन्माद है 'इन दिनों'

हुँकार रैली महारेली 
परिवर्तन शँखनाद रेली
धिक्कार रेली थू थू रेली
स्वाभिमान रेली
गलाफाड़ बकवास रेली
सब तरफ़ चित्कार हाहाकार
रेलियों की रेलमपेली 'इन दिनों'

जो भी योद्धा है इस युद्ध का
भौंक रहा अपनें हिस्से का
आइने में देखता हूँ अपना चेहरा
घबरा जाता हूँ
आँखें लाल हुईं हैं
हिंस्र हुआ जाता है
मेरी भृकुटि भी तनी रहती है 'इन दिनों'

Saturday, October 24, 2015

गोल घेरे में घूमती औरत

गोल घेरे में घूमती औरत
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वर्जनाओं का दायरा बढ़ा
खिंच रही लक्ष्मण रेखाएँ 

मासूम लगते शिकंजे
लुभाते नये हथकंडे
गोल घेरे में घूमती औरत
बाड़े में बंद औरत
अपने हिस्से का ढूंढ रही आसमान
अपनें हिस्से का मकान 

लक्ष्मण घेरे से बाहर था
अब भी बाहर है 


Wednesday, October 21, 2015

गर्म तवा

गर्म तवा
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सेंको रोटियाँ 
गर्म    तवा है
बाकी तो बस
हवा ही हवा है

राजा तब और अब

राजा तब अब 
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उन्होंने 
कुएँ खुदवाये 
*
इन्होंने 
खाइयाँ 

🌑 जसबीर चावला 

सुकरात और सुअर

सुकरात और सुअर
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मन के असहमत सुकरात को 
मार दिया 
अब पूर्ण संतुष्ट हूँ
बाड़े में बंद सुअर हूँ 

// जसबीर चावला //

विष्णुजी स्विस में

विष्णुजी ग़ायब
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विष्णुजी लापता
परेशान लक्ष्मी
पड़ोस में नहीं
'बैकुंठ' में कहीं नहीं

'उल्लू' दौड़ाया
खबर लाया
विष्णुजी मिल गये
दो नंबरी लछमी संग
'स्विसबैंक' में रमण कर रहे

☘️ जसबीर चावला 

Tuesday, October 20, 2015

देवताओं से मिली इन्हें मारनें की सनद

देवताओं से मिली इन्हें मारनें की सनद
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वे जब मार देंगे
तर्क और वजह ढूँढ लेंगें
विचारक वकील दलील जुटा लेंगे
बोलना लिखना पढ़ना भी एक जायज़ वजह है मारने की
मरने वाला उनके हित मे लिखता नहीं था
उनकी पुस्तकें पढ़ता नहीं था
विधर्मी था नास्तिक था
और बड़ा गुनाहगार था
मारने के लिये मार देंगे
देवताओं से मिली है उन्हे मारने की सनद



Saturday, October 17, 2015

पार्टी प्रवक्ता:सुकरात से सुअर

पार्टी प्रवक्ता : सुकरात से सुअर


सोमवार से वीरवार तक
चेहरे पर तना मुक्का टंगा था
शुक्रवार सत्ता से मिला
छक कर अघा गया
शनिवार आईना देखा
बदलाव नजर आया 
रविवार पूर्ण रुपांतरण हो गया 
असंतुष्ट सुकरात से संतुष्ट सुअर हो गया 
अब बाड़े में रहता है
पार्टी का प्रवक्ता है 



आरती नहीं महा आरती

आरती नहीं महा आरती 
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अब पंचायत नहीं महापंचायत होती है
प्रसाद महाप्रसाद
प्रभु महाप्रभु
कहाँ होती है रैली
महारैली होती है
आरती नहीं महाआरती
यज्ञ महायज्ञ
आंदोलन बने महाआंदोलन
शिवरात्रि हुई महाशिवरात्रि
राणा गये महाराणा आ गये
नायक महानायक हुए
पुरुष महापुरुष हुए
अब घोटाला नहीं महाघोटाला होता है
शांति मौत सी महाशांति हुई
यात्रा जैसे कंधे पर सवार महायात्रा हुई
पंडित महापंडित बने
संत अब चरित्रहीन नहीं महाचरित्रहीन हैं
सत्ता में अब कमीन कम महाकमीन हैं

😜  जसबीर चावला 







मेरे गाँव का मुखिया

मेरे गाँव का मुखिया 
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जहाँ चुप रहना है
बोलता हैं
जहाँ बोलना है 
भौंकता हैं
जहाँ भौंकना है
मुड़कर दौड़ता हैं
जहाँ दौड़ना हे 
रुकता हैं
जहाँ रुकना है
झुकता हैं
जहाँ  झपटना हैं
दुम टटोलता हैं

गाँव का मुखिया
डुबो देगा लुटिया

इस देश को क्या हुआ

इस देश को क्या हुआ

सतत डराते जिन्न 
बुरी आत्माएँ
सन्नाटा तोड़ती उल्लूओं की आवाज़
चमगादड़ों का शोर 
कभी डायनों का प्रलाप
आग उगलता अगिया बेताल
शांति भंग हुई
राम का देश 
रामसे बंधु की हॉरर मूवी बना
दिन रात टीवी पर करकट दमनक की हुआ हुआ
तुम पूछते हो देश को क्या हुआ ?

☘ जसबीर चावला



Friday, October 16, 2015

प्रेम दीवानी मीरा और सहेली

प्रेम दीवानी मीरा और सहेली 
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प्रेम दीवानी मीरा 
मेरो दरद न जाने कोय
सहेली ने कान में चुपके से कहा
गायनोक्लोजिस्ट को दिखाया
तेरो  दरद न जाने कोय
उठ बावली घर बैठी क्यों रोय

कबीर और ड्रायक्लिंनिंग

कबीर और ड्रायक्लिंनिंग 
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‘दास कबीर जतन से ओड़ी,ज्यों कि त्यों धर दीनी चदरिया‘ 
कबीर घर में घुसे गुनगुनाते हुए

अंदर से कर्कश आवाज आई 
भुनभुनाते हुए 

ड्रायक्लीन कब करवाओगे
कहा पिनपिनाते हुए

संदूक में क्यों रखी मैली चदरिया‘
कब सुधरोगे कबीर,बोला झल्लाते हुए

😊 जसबीर चावला 

गेंडों में हीनता बोध

गेंडों में हीनता बोध
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मंत्री का मुँह खुला
गेंडे लजाये 
गेंडो को अपनी मोटी खाल का गुमान था
डूब मरे

मंत्री तो श्मशान का अगिया बेताल था 
उनका भी बाप था