Monday, September 28, 2015

धरती के अंतिम सम्राट

धरती के अंतिम सम्राट
--------------------

जब अंतिम फल भी तोड़ लिया जायेगा पेड़ से
अंतिम पेड़ काट लिया जायेगा
आखरी नदी विषाक्त होगी
पाताल तक छेदा जायेगा
पानी की अंतिम बूँद निचोड़ी जायेगी 

उदरस्थ होगा अंतिम पक्षी 
सागर की अंतिम मछली 
आख़री जानवर हलाक हो चुका होगा
जहर घुला होगा हवाओं में 
रानी मधुमक्खी भी मर चुकी होगी शहद के छत्ते में 
रॉकी पर्वत से उड़ चुकी होगी आख़री मोनार्क

मेरे आका सारी धरती तुम्हारी होगी
बस तुम ही अकेले होगे अंतिम सम्राट 


// जसबीर चावला //

अंडमान में सभ्यता की तलाश

अंडमान में सभ्यता की तलाश
———-————————

अँडमान का वर्जित 'सेंटीनल द्वीप' 
वहाँ रहना चाहता हूँ
सबसे अलग थलग
भाषा,स्कूल नहीं
कुछ इशारे हैं,कुछ ध्वनियाँ हैं
बिना भाषा के अनपढ़ रहना चाहता हूँ

कोई धर्म नहीं,धर्मस्थल नही
अधर्मी रहना चाहता हूँ 
मकान नहीं
पेडों पर रहना चाहता हूँ
बिना दीवारों की झोपड़ी में रहना चाहता हूँ
खेती नहीं अनाज कपडे नहीं
दिगम्बर रहना चाहता हूँ
कँदमूल,शहद,शिकार है
लकड़ी के भाले से मछली मारना चाहता हूँ

'गार्डन आफ ईडन' चाहता हूँ
अपनी लाखों साल पुरानी जड़ों की तलाश में हूँ
आदिम 'सेंटीनली' के बीच रहना चाहता हूँ
बाहरी को मार डालते हैं
शायद मुझे अपनायें
भय मुक्त होना चाहता हूँ
थोड़ा सभ्य बनना चाहता हूँ

     ☘️ जसबीर चावला

मनरेगा

सारेगम / मनरेगा

                       

'मनरेगा' का पैसा आया
मुदित हुआ मन
सरपंच / नेता पुत्र का

संगीत शिक्षक पुत्र द्वय से बोला
गाओ सा रे ग म
दोनो ने गाया
सारेगम 'मनरेगा'
मन रे 'गा'
गा मेरे मन गा
मन तू नाच गा
गा गा बस गा
मन रे'गा'
सफल हुई तेरी अाराधना
मन रे'गा' मन रे'गा'

// जसबीर चावला //

चुप रहैं दंगे जारी हैं

चुप रहैं दंगे जारी हैं 
---------------

चुप रहैं दंगे चल रहे हैं
ख़लल पडता है बोलने से 
तुम्हारे सोचने से
दंगों की शांति भंग न करें
शांतिपूर्वक चलनें दें दंगे
सड़कों पर भी / मन में भी चलनें दें
मनुहार है / डाँट है / धमकी है चुप रहैं 
यज्ञ की पूर्णाहुति के लिये 
चुप रहैं दंगो की वैधता के लिये 

दंगे तो नित्यकर्म है
राष्ट्रीय धर्म / विचारित कर्म है
एजेंडा है / पीटनें का डंडा है
दंगे पहचान है / दंगों में जान है
दंगे स्पंदन हैं / नवनीत मंथन हैं
विचार धारा है / भाईचारा है
अभिव्यक्ति है / बचपन से पिलाई  घुट्टी है
एक मानस है / सोच है / जोश है / ख़ौफ़ है
दंगे उद्यम है / उद्योग है
उन्माद है / प्रमाद है
साध्य है / साधन है
विध्वंस हैं / विस्थापन हैं
रोजगार है / पुनर्निर्माण है
धर्म की खोट हैं / भावनाओं का विस्फोट हैं 
श्रीकृष्ण लिब्रहान आयोग हैं
दंगे जज वकील दलील हैं 
दंगे ज्ञान विज्ञान है / ललित कला है
क्रिया की प्रतिकिया न्युटन का लॉ है

दंगे धमनियों में बहता रक्त है
अवरोध न लगाएँ 
चुपचाप चुप लगाएँ 
भीगी बिल्ली बन घर बैठें / दूम दबाएँ 
घर में केरम खेलें
दिमाग को साम्प्रदायिक ताला लगाएँ 
रोके नहीं सुचारू चलनें दें दंगे

चुप रहैं दंगे जारी हैं

// जसबीर चावला //

पेटलावद

पेटलावद 

पेटलावद तो पेटलावद है
अक्षरधाम नहीं
आसाराम नहीं
मुंबई की इन्द्राणी,राधेमाँ नहीं
हार्दिक पटेल,ललित मोदी नही
ऊंघती सरकार की लापरवाही नहीं
प्रभु की लीला है
झाबुआ ज़िले का रोता गाँव
फालतू फ़ुटेज का हकदार नहीं
बहुत खा चुका अखबारी स्पेस 
जले माँस के लोथड़े,गँधाती ख़बरें 
अब ज़ायक़ेदार नहीं
पेटलावद गहरी चुप्पी है
गूगल के पेट पड़ी अर्थहीन सरकारी जांच 
दाग धोने काम आयेगी किसी वक्त
आदिवासी है पेटलावद 
शहरी राजघाट नहीं
डिज़ीटली स्मार्ट नहीं
पेटलावद बस पेटलावद है

// जसबीर चावला // 

Thursday, September 24, 2015

पूर्ण संतुष्ट सुअर

पूर्ण संतुष्ट सुअर

वे अखबार नहीं पढते 
समाचार नहीं सुनते
किताब नहीं पढते
बहस नहीं करते
बेचेन नहीं होते
कहीं अपना मत नहीं देते
मुक्का नहीं तानते
प्रतिरोध नहीं करते
माला जपते हैं
कभी असंतुष्ट सुकरात हुए नहीं
पूर्ण संतुष्ट सुअर हैं
उनकी असहमती की औक़ात नही 














Sunday, September 20, 2015

विचार की कीमत आप ही चुकायेंगे

विचार की कीमत आप ही चुकायेंगे 

मैं सहमत हूँ आपसे
पर कोई साथ नहीं चलेगा
विचार की कीमत तो आप ही चुकायेंगे
गोलबंद हैं वे फिर मार देंगे
कोई साथ नहीं मरेगा
काग़ज़ी फूलों के साथ हम मोमबत्ती जलायेंगे
श्रद्धांजलि का सनातन क्रियाकर्म
'नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक:'
विचार नहीं शरीर मरता है
पिछली बार भी हमने यही कहा था
पुन:भीड़ में खो जायेंगे
लौटेंगे अगली हत्या पर
आते रहेंगे तब तक
विचार के पूरी तरह मर जानें तक
खुद मार नहीं दिये जानें तक 





Wednesday, September 9, 2015

विधवा माँओं की चिंता

विधवा माँओं की चिंता
--------------------
विधवाओं की चिंता
धर्म का ध्यान
वृंदावन छोड़ आते हैं

भजनीक बनें माएँ 
पाप धुलें सबके 
वैराग्य करें 
काशी छोड़ आते हैं 

स्वर्गारोहण की नसेनी 
भिक्षा माँगे 
कुंभ मेले में छोड़ जाते हैं


Tuesday, September 8, 2015

मैं इत्तफ़ाक़ नहीं रखता

इत्तेफ़ाक़ नहीं रखता
———————

इत्तेफ़ाक़ नहीं रखता
तुम्हारे झँडे से 
तुम्हारे डँडे से
तुम्हारी मज़हबी दास्तानों से 
बाँधे जा रहे तावीज़ गंडे से
इत्तेफ़ाक़ नहीं रखता 
संविधान का दम घोंटती तुम्हारी उँगलियों से
कुतरी जा रही आजादी से 
'सिरफिरों' के हो रहे मुसल्सल क़त्लों से 
अगला नाम लिखने वाले पंडे से

इत्तेफ़ाक़ रखता हूँ
तुम्हारे चेहरे की नक़ाब सरकने से   
क़लई के खुल जानें से
सलामत रहेगा कौन कब तक 
फिर भी नाइत्तेफाकी है तुम्हारे एजेंडे से

( दिवंगत पत्रकार गौरी लंकेश को समर्पित )






Sunday, September 6, 2015

वैश्विकरण के रोबोट

वैश्विकरण के रोबोट
------------------------
एक रोबोट कार बनायेगा
दूसरा चलायेगा
बैठेगा कौन ?
एक रोबोट फुटबाल बनायेगा
दूसरा किक लगायेगा
खेलेगा कौन ?
एक रोबोट अनाज उगायेगा
दूसरा वेयर हाउस बनायेगा
खरीदेगा कौन ?
एक रोबोट बंदूक़ बनायेगा
दूसरा ट्रिगर दबायेगा
मरेगा कौन ?

सभी प्रश्नों का उत्तर देगी
वंचित लोगों की फ़ौज 
और कौन ?




Friday, September 4, 2015

The last Emperor of Dynasty

The last Emperor of Dynasty 
---------------------------------

When,
The last fruit plucked 
The last tree felled,
The air turns hazardous 
The streams become poisonous,
The last drop of water drilled 
and squeezed, 
The last fish caught
The last bird consumed 
The last animal slaughtered,

When the last Monarch of Rocky Mountain has flown 
And the Queen bee dead

Then the entire world will be yours
You would be the lone Emperor 

🌟 Jasbir Chawla 🌟

मैं सहमत नहीं हूँ

मैं सहमत नहीं हूँ
——————

हाँ मैं सहमत नहीं हूँ
तुम्हारे झंडे से
तुम्हारे डंडे से
तुम्हारी पौराणिक पुड़ियाओं से 
बाँधे जा रहे तावीज़ गंडे से

हाँ मैं सहमत नहीं हूँ 
संविधान का गला घोंटती तुम्हारी उंगलियों से
कुतरी जा रही आजादी से 
'सिरफिरों' की हत्याओं से 
बही में अगला नाम लिखने वाले पंडे से

हाँ मैं सहमत हूँ 
चेहरे का मुखोटा सरकने से 
तुम्हारी क़लई खुल जाने से 
जानता नहीं कि सलामत रहूँगा कब तक 
फिर भी असहमत हूँ तुम्हारे एजेंडे से 











कभी वॉच डॉग थे ये कुत्ते

कभी वॉच डॉग थे ये कुत्ते
————————-

सतत भौंकने वाले कुत्ते
भौंकने की स्पर्धा करते कुत्ते
तेज भौंकने वाले 
रह रह कर भौंकने वाले कुत्ते
निरंतर दुम हिलाते 
तलवे चाटने वाले कुत्ते 
कारपोरेट संस्कृति में ढले 
चोरों के संग डिनर खाते कुत्ते 
वारदात पर चुप लगाते 
चुप की जगह भौंकने वाले कुत्ते
आम जन पर झपटते कुत्ते
गाफ़िल कुत्ते खूंखार कुत्ते

कभी वॉच डॉग थे ये कुत्ते
पूडल बने मेरी गली के कुत्ते