शिवपुरी में बच्चों की हत्या:विधी का विधान
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लाठी उनकी ईश्वर उनका
सपनें भी उनके हैं
दबंगों को ईश्वरीय सपना आया
'बच्चे दलित नहीं,राक्षस हैं'
ईश्वर का आदेश है उनको मार दो
सदियों की सनातन परंपरा है
जिव्हा काट दो
कानों में पिघला सीसा डाल दो
आदेश का पालन हुआ
राक्षसों को न मारते तो पाप होता
भगवान का श्राप होता
कर्म गति है
लिखित विधी विधान है
होता आया है आगे भी होगा
'धर्मयुद्ध' का द्वितीय चरण चल रहा है
'खुले में शौच' मात्र निमित्त है
रोशनी अविनाश बलि चढ़े हैं
'दुष्टों के संहार' में कइयों को आगे भी चढ़ना होगा
‘विधी के विधान’ का हर हाल में पालन होगा
(शिवपुरी में सड़क किनारे शौच करते दलित बच्चे रोशनी(१२साल की बुआ)अविनाश(१० साल का भतीजा) को दंबगो नें पीट कर मार डाला.एक को सपना आया था कि दलित राक्षस हैं )
🦉 ज स बी र चा व ला