Friday, June 6, 2014

खंडित द्रौपदी

खंडित द्रौपदी
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न खाने की थी न पीने की वस्तु थी 
माँ कुंती का आदेश था
पाँच आज्ञाकारी बेटों में बँट गई

द्रौपदी तब से बँटी ही है

Thursday, June 5, 2014

जागो

जागो
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चापलूसी
जय जयकार
छुपे भेडिये
भेड़ की खाल
लुट रहा माल
बँट रहा देश
बुरा हाल
जागो

कबीर की लापता चादर

कबीर की लापता चादर

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'दास कबीर जतन से ओढ़ी ज्यों की त्यों धर दीनी चदरिया'

इतनी ही पूँजी थी 

फक्कड़ जुलाहे की

खुद ओढ़ता बिछाता

सबको ओढ़ाता 

मन में तहा कर रखी चादर

फटनें न दी जीते जी चादर

अब खो गई है वह

ढूँढ रहे हम कबीर की लापता चादर

हिन्दुओं सिक्खों मुसलमानों में

काशी क़ाबा अयोध्या में

बाबाओं के धोबी घाटों में


गंदे कपड़ों के ढेर मिलते हैं

धर्म की दुकानें,घृणा मिलती है

सद्भाव नहीं मिलता

भाईचारा नहीं मिलता

खोई चादर नहीं मिलती

कबीर नहीं मिलता

कुप्पा

कुप्पा
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कर दूँ चीन के दाँत खट्टे
पाकिस्तान का मुंह तोड़ दूँ
डरे अमेरिका मुझसे
सारी कायनात डरे
हर बीमारी का इलाज हे मेरे पास
सर्वशक्तिमान
विकास हो या विनाश
हर समस्या का हल
रुठी प्रेमिका को मनाना है
उठाना है
संतान होने की गारंटी
विवाह / मुकदमें में जीत
मेल बेमेल रिश्ते ही रिश्ते
वशिकरण जानता हूँ
एक बार मिल तो लें

रोड शो

रोड शो
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चुनाव खत्म हुए
राजनैतिक रोड शो ख़त्म हुए
रोड पर जो रहते थे
अब भी वहीं रहेंगे
उनके बच्चे
उनके भी बच्चे
राजनीति के रोड मेप में उनका कोई स्थान नहीं
वे वहीं मरेंगे
भूख से बिमारी से
सलमान की बेक़ाबू गाड़ी से

तमाशबीन जुटते हैं
किराये पर मिलते है
रामलीला हो या फ़ैशन शो हो
राजनैतिक रोड शो हो

शो मस्ट गो ऑन


पाठक की व्यथा

पाठक की व्यथा
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खूब बिक रहा अख़बार
पाँचो उँगलियाँ घीं में
जब से 'बिका' मालिक और उसका अखबार

नये देवताओं की तलाश

नये देवताओं की तलाश
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कभी हम थे तैंतीस करोड़ 
तैंतीस करोड़ देवता थे
एक के लिये एक देवता

हम बढ़ कर एक सौ तीस करोड़ हुए
देवता बढ़े नहीं 
उन पर बोझ बड़ा
चार आदमी के लिये एक देवता
बहुत नाइंसाफ़ी है
भार से लदे देवता हमें माफ़ करे
अब किस देव की उपासना हम करें

तलाशें नये देवता ईश्वर
धर्मस्थल क़ब्ज़ाएँ 
पहाड़ों नदियों गुफाओं का अतिक्रमण करें  
नये धर्म स्थल बनाएँ 
सड़कों चौराहों पर लाल पत्थर लगाएँ 
नये देवताओं का जश्न मनाएँ

इतिहास का परिहास:मेरा टेसू वहीं अड़ा

इतिहास का परिहास
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सिकन्दर लौटा था पँजाब से वापस
इनका बिहार तक गया
भगतसिंह / राजगुरू / सुखदेव बंद थे लाहोर जेल में
इन्होंने अंडमान भेजा
आज भी तक्षशिला पाकिस्तान में है
इन्हें बिहार में मिला
इतिहास पर भारी अज्ञान
'मैं चाहूँ यह कहूँ मैं चाहे वह कहूँ मेरी मर्ज़ी'






चलो मर्द बनो

चलो मर्द बनो
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देश का वीरगाथा काल
घर घर में रोपेगें अश्वगँधा
मुफ्त मिलेगी शिलाजीत की पुड़िया
लोक गीत में किन्नर गाते थे
'हाय हाय आग लगे तेरे अश्वगँधा के खेत में'
किन्नर अब गा न सकेंगे
दिन फिरे बाबाओं भाटों के
चरमराती खाटों के
भारतमाता की जय बोलो
लाठी चलाओ
मर्द बनाने का काम प्रगति पर है
फटाफट अपना नाम लिखाओ

🌿 जसबीर चावला 
       6/5/2014 


उपयुक्त स्थान

 उपयुक्त स्थान
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बहुत सिर चढ़ गया भगवान
थोड़ा करें किनारे
कम दुलारें
🔹
कहीं बस्ती में भेजें
उसे इंसान बनायें
सिर से उतारें

पाँचों उँगलियाँ घीं में

पाँचों उँगलियाँ घीं में
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मीडिया का स्वर्ण काल
बिकाऊ रीढ़
पुष्य नक्षत्र
धनतेरस
खबरों का अकाल
अब यही है 'बड़ी खबर'
बरस रहा सोना
अख़बार और टीवी पर

☘  जसबीर चावला





सवाल करने में दिल लगता है

सवाल करने में दिल लगता है
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टोपी उतारते हैं
स्याही पोतते हैं
मुक्का मारते
जूता फेंकते
पत्थर फेंकते 
घेराव करते
अफ़वाहें फैलाते हैं
बन पड़े सब करते हैं

बस सवाल नहीं करते
सवाल करनें में दिल लगता है
दिमाग़ भी लगता है