Friday, December 15, 2017

इंसान और भेड़िया

नीच इंसान और भेडिया
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तुम इंसान नहीं हो
भेड़िये हो 
गाली देकर पछताया
भेड़िये ने मेरा क्या बिगाड़ा था 
मैंने भेड़िये से पुरज़ोर माफी माँग ली

धारदार

धारदार
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जो  रेतनें  के  क़ाबिल हैं  कुँद छुरी  से 
क्यों लिखूँ उनके लिये धारदार कविता

कैसा हो ईश्वर

कैसा हो ईश्वर
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मूक,बधिर,दृष्टिहीन न हो 
पाषाण न हो
संचेतन,संवेदनशील हो
ग्रँथों में ही सिमटा न हो 

नया ईश्वर बनाया जाये
विकलांग ईश्वर हटाया जाये

अपना अपना धर्म

अपना अपना धर्म
       ———

क्या कौए से कहोगे काँव काँव बंद करे ?
टीवी के नाग डँसना बंद करें ?
सियार रोक दे हुआ हुआ ?
मैंडक छोड़ दें टर्राना ?

न कहें कुत्तों से कि न भौंके
उनका धर्म है भौंकना
धर्म पालन करने दें
कुत्तों को आज़ादी से भौंकने दें

☘ जसबीर चावला

Sunday, October 22, 2017

देश की मिट्टी में मिली सबकी मिट्टी

देश की मिट्टी में मिली सबकी मिट्टी
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दुराग्रही खोल से बाहर निकलो
हूण शक यूनानी अरब मंगोल बाहर से आये
घर बसा के यहीं के हुए

देश की  मिट्टी में  मिली सबकी मिट्टी
किसकी रगों में किसका खून बहता है

इतिहास के पन्नें मत फाड़ो
अपना चश्मा बदलो
वक्त आ गया है चश्में का नंबर बदलो

          ☘ जसबीर चावला

Monday, September 11, 2017

मृत्यु का जश्न मनाते गिद्ध

मृत्यु का जश्न मनाते गिद्ध
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जिन गोलियों से मरी गोरी लंकेश 
उसी विचार फेक्ट्री का ठप्पा था
जहाँ से लेते हैं तालिबान 

सँविधान के जिस सहारे खड़ी गौरी
उसके चिथड़े हवा में बिखरे 
जमीन पर पड़ी रक्तरंजित फ़ाख्ता 
गिद्ध मृत्यु का जश्न मना रहे 


☘ जसबीर चावला

Monday, July 31, 2017

ताजमहल और हमारी संस्कृति

ताजमहल और हमारी संस्कृति 
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गवर्नर जनरल बेंटिंक नें ढेरों सुधार किये
सती प्रथा रोकी
बाल / बहु विवाह रोके 
ठगों को फाँसी लटकाया
अदालतों के ढंग बदले 

चरम घाटे में थी तब अर्थ व्यवस्था 
क़िले का बचा मार्बल बेचा
अकबर की प्रसिद्ध तोप तोड़ कर बेची 
सोचा ताजमहल भी गिरा दूँ 
मार्बल को इंग्लेंड बेच धन कमा लूँ 

सच उसने भूल की जो न तोड़ा 
ताज टूटता 
ओने पौने बिक जाता
संस्कारित सरकारें आज परेशान न होती 
ताजमहल को अछूत घोषित करनें से बच जाती.

(लॉर्ड विलियम बेंटिंक,देश का गवर्नर जनरल 1828)

Saturday, July 29, 2017

जोसफ़ रुडियार्ड किपलिंग फिर पधारो म्हारे देस

कोरोना वायरस : जोसफ़ रुडियार्ड किपलिंग फिर पधारो म्हारे देस
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किपलिंग तुमने लिखा था
'भारत साधुओं सँपेरों का देश है'
देश उससे बहुत आगे आ गया है

गाय ने तय किया देश का एजेंडा
भगवा ने तिरंगे को ढक दिया
सत्ता के मल कुण्ड में आकँठ डूबे साधु
दिनरात पंतजलि को बेचते साधु
प्रकृति का विनाश करते साधु
सितारा आश्रमों में रहते  साधु
रास लीला कर जेल जाते साधु
गर्भ में ‘पुत्रबीजक’ रोपते साधु
संभोग में समाधि तलाशते साधु
साधु साधु साधु साधु

मंत्र शक्ति से विमान उड़ते
विमानों में रिवर्स गियर लगते
कोरोना का इलाज गोबर गोमूत्र से हो रहा 
विकिरण को गोबर समाप्त कर रहा
ज्योतिष अस्पताल में मरीज़ की अंतिम घड़ियाँ गिन रहा
विज्ञान धर्म के द्वार चिलम भर रहा 
सारा देश नागिन डाँस कर रहा

किपलिंग तुम मुंबई में जन्में फिर आओ
गोबर स्नान करो
गोमूत्र पान की मुफ़्त सुविधा एअरपोर्ट पर पाओ
'वेस्टमिनिस्टर' में तुम्हारी कब्र पर मैंने इन्विटेशन रखा है 
केसरिया बालम पधारो म्हारे देस 
‘किपलिंग फिर पधारो म्हारे देस’

☘️ जसबीर चावला

Monday, July 24, 2017

काठ की हाँड़ी



काठ की हाँडी 
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नहीं चढ़ती दुबारा काठ की हाँडी 
न चढ़े 
गोदाम भरे हैं 
छोड़ देंगे नया शिगूफ़ा 
सुना देंगे एक और जुमला
चढ़ा लेंगे दूजी काठ की हाँड़ी
जय बाबा केदारनाथ की

🦉 ज स बी र  चा व ला 
                
(एंबुलेंस वाला ड्रामा गुजरात के बाद हिमाचल में भी !)

                

क्या फर्क है जुनेद और बब्बल में

क्या फर्क है जुनेद और बब्बल में 
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जुनेद तुम ऐन ईद के वक्त रुखसत हुए
बिना सलाम बिना ईदी लिये
तुम्हारा घर बेघर हुआ 
जो सैंवईयाँ लाये थे कभी नहीं पकेंगीं
इस घर में अब ईद कैसे मनेगी

हमारा 'बब्बल' भी चौरासी में ऐसे बिदा हुआ 
अट्ठारह का बब्बल
अमृतसर से मत्था टेक लौट रहा था 
परिजनों सहित ट्रेन में मारा गया 

हत्यारे कभी पकड़े नहीं गये
क्या तुम्हारे पकड़े जायेंगे ?
हत्यारे चेहरा नहीं मुखोटा है 
चाबी वाले बिना दिमाग के गुड्डे
हत्यायें नीतिगत विचार है
एक सोचा समझा फैसला 
हत्यारे फ़रार नहीं आस पास है

तुम आज जिंदा होते
अगर नाम जुनेद नहीं जगन होता 
दाढ़ी,गोल टोपी न होती
बब्बल का नाम बलराम होता
सिर पर बँधा पटका न होता

देश की दशा

देश की दशा
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देश चल नहीं रहा
बुरी तरह हिल रहा 
बुनियाद हिल रही 
आँखें खोलो
थाम सको तो थाम लो 

जैसा तुम चाहो

जैसा तुम चाहो 
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नवाज़े     जायेंगें
जो सर झुकायेंगे

कुचले     जायेंगे 
जो  सर  उठायेंगे 

सर  आप  का है
चाहे       झुकायें
चाहे         उठायें

🔵

जैसा तुम चाहो
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सर पर बिठाया जायेगा 
नवाज़ा जायेगा 
जो हाँ में हाँ मिलायेगा

कुचला जायेगा 
नेस्तनाबूद होगा
जो सर उठायेगा 

सर  भी  आपका 
मर्जी भी आपकी

कैसे कैसे लोग

कैसे कैसे लोग
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साँचे  में  ढले  लोग
एक सी  चाल ढाल
एक सा क़दम ताल
हाथों में ख़ंजर लिये 
एक  खाँचे में  फ़िट 
घुटनें में सिर लगाये
हाय राम  कैसे  रोग
कौन ये बिमार  लोग

Monday, June 19, 2017

युद्धस्तर

युद्धस्तर
—•—

सरकारें युद्धस्तर पर काम करती हैं
युद्ध न हो रहा हो तो युद्धविराम नहीं करती
स्तर बढा लेती हैं
नागरिकों से युद्ध करती हैं
आसपास नफ़रत की खाइयाँ खोदती हैं 
कटीले तारों की बाड़ कीलें बिछाती हैं
अपना युद्ध का कौशल बढ़ाती हैं.

Wednesday, June 14, 2017

पलायन

पलायन
———

जतन से सन्नाटा बुना 
चुप्पी ओढ़ी
आँखे मूँद ली
मन अपराध बोध से मुक्त हुआ 
पूर्ण संतुष्ट हूँ 

बाहर अब परम शांति है
देश अपराध मुक्त हुआ

Wednesday, May 31, 2017

खेला प्रचार का



खेला प्रचार का
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अखबार वस्त्र नहीं हैं
रंगीन विज्ञापनों से शरीर नहीं ढँकता
काठ के डोलते घोड़े पर बैठा आत्म मुग्ध नायक
हवाई कामों का पीट रहा डंका

टीवी स्टूडियो में गाय
कौओं की काँव काँव 
मन में छुपा बच्चा झूठ नहीं बोलता 
हाथी पर बैठा नंगा है राजा है


☘ ज स बी र  चा व ला

Friday, May 26, 2017

नक्कारखाने में तूती की आवाज

नक्कारखाने में तूती की आवाज
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ऊपर से फ़रमान आया
जश्न मनाओ 
ढोल पीटो
गाँव गली तक संदेश पहुँचा 
पीटो 
पीटो 
लोग पिट रहे
मर रहे
वे पीट रहे

पिटने की आवाज कैसे ऊपर पहुँचे 
वहाँ जोर जोर से ढोल पिट रहे 

☘ ज स बी र  चा व ला

Wednesday, May 17, 2017

इतिहास नहीं चश्मा बदलो

इतिहास नहीं चश्मा बदलो
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मैंने हजार साल के इतिहास को बुहार दिया
बादशाहों को गर्दन पकड़ निकाल दिया
स्याही पोत दी उनके हर नाम और काम पर
बाबर,हुमायूँ,अकबर,जहाँगीर,शाहजहाँ को बेकिताब किया
बहादुरशाह ज़फ़र भी हकाले गये
पन्ने फाड़े मंगोल,मुग़ल,लोधी,गुलामवँश के
ताजमहल को तेजोमहल किया
कुतुब,लाल क़िला तंबू से ढक दिया
🩸
देखा,इतिहास से खून का रिसाव रुका नहीं
हर तरफ़ तलवारों/टापों की आवाज़ थी
दक्षिण में चोल,चेर,काकितेय,राष्ट्रकूट,पँडियन,पल्लव लड़ रहे
चोल राजेन्द्र साम्राज्य को इंडोनेशिया तक ले गये
उत्तर में चंदेल,परमार,सोलंकी,प्रतिहार तलवारें भाँज रहे
कोशल,मगध की सीमा मौर्य गुप्त बड़ा रहे
बंगाल के पाल सेन लड़ रहे
राजपूत,मराठे,सिक्ख तोपें दाग रहे
दरबारों में सामंत भाई-भाई षड्यंत्रों में लिप्त दिखे
रानियाँ इन सबमें शामिल थीं 
इतिहास की हर पंक्ति खून से लथपथ थी
कौनसा धर्म था जहाँ मार काट नहीं मची थी ?
जैन बौद्ध शैव वैष्णव सब लड़ रहे
आँखें फोड़ रहे,घट्टे में सिर पीस रहे
राजाओं बादशाहों की समान लिप्सा थी
सम्राटों नवाबों की एक ही किताब थी
🩸
दुराग्रही खोल से बाहर निकलो
हूण शक यूनानी अरब सब बाहर से आये
घर बसाया इस वतन के हुए
देश की मिट्टी में मिली सबकी मिट्टी
जाने किसकी रगों में किसका खून है
जनता की बात करो
मुर्दों की नहीं मुद्दों की बात करो
🩸
इतिहास के पन्नें नहीं अपना चश्मा बदलो
वक्त बीत रहा है चश्में का नंबर बदलो

Wednesday, May 10, 2017

भेड़िये का रूपांतरण

रूपांतरण
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भेड़िया पहले भी आता था
वक्त के दबाव से चोला बदला
भेड़ की खाल ओढ़ी
समय बदला
गाय बना
यहीँ आसपास ही रहता है
भेड़िया अब कहीं नहीं जाता

Tuesday, May 9, 2017

निर्भया को न्याय मिला

निर्भया को न्याय मिला
————————

मोमबत्तियाँ जली 
टीवी अखबार जागे
सुप्रीमकोर्ट ने देखा
ऊँघते राष्ट्र की सामूहिक चेतना जाग चुकी 
फैसला दिया 
निर्भया को मर कर न्याय मिला

गर्भवती बिलकिस भी गेंगरेप का शिकार बनी
छोटी बच्ची पटक कर मारी गई
चौदह परिजन मरे
बिलकिस बानो अभी जिंदा है
उम्मीद है न्याय की देवी पट्टी हटायेगी
राष्ट्र की सामूहिक चेतना जागेगी

Wednesday, April 26, 2017

कड़ी निंदा

कड़ी निंदा
————

हम हमले की 'कड़ी' निंदा करते हैं 

रसोई से आवाज आई
टीवी बयान हो चुका  
अंदर आओ

आज 'कढ़ी' बनी है 

Thursday, April 20, 2017

मशाल जलती रहेगी

मशाल जलती रहेगी
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मशाल खान उन्मादी भीड द्वारा मारा गया
सुपुर्द-ए-खाक हो गया
क्या मशाल मर गया
मशाल खान मरते नहीं
फिर कोई और आयेगा 
बेखौफ मशाल जलायेगा
मशाल बुझेगी नहीं

☘ ज स बी र  चा व ला
(मशाल खान यूसुफ़जई उन्मादी भीड द्वारा मारा गया)

Friday, April 14, 2017

क्यों बदल गई कविता

क्यों बदल गई कविता
–———••———–

क्यों झील सी आँखों में डूबती नहीं
गालों के तिल पर अटकती नहीं 
क्यों नहीं अधरों जुल्फों में उलझती
नहीं टाँकती जूड़े मे फूल
सहज प्रेम करना भूली
क्या बदल गई कविता ?
 
हाँ बदल गई कविता 
कविता गुस्सा,गुबार,उलाहना बनी है 
पाखँड की परतें उघेड़ रही 
ताल ठोंक सरकार के खिलाफ खड़ी 
व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करती उठी उँगली है
भिड़ने को तैयार है कविता
सशक्त गालियाँ हैं कविता 

जब पेलेटगन अपना स्वभाव बदलेगी
लाठियाँ नहीं बरसेंगी 
छर्रे चलेंगे नहीं रंग बरसेंगे
पत्थर नहीं फूल बरसेंगे
कविता फिर प्रेम करेगी 
फिर से प्रेम गीत रचेगी

Monday, April 10, 2017

हवाओं पर प्रेतों का क़ब्ज़ा है

हवाओं पर प्रेतों का क़ब्ज़ा है
——————————

हवाओं में गहरी साजिश है
एक थमती नहीं कि दूसरी आँधी बन आती 
छोड़ जाती पीछे जली बस्तियों की गँध
पिंड बने शरीरों की गँध         
कब बवँडर बन जायें हवाएँ
बस्तियाँ वीरान कर जायेँ

खास दिशा से आ रही गर्म हवा
हवाओं पर प्रेतों का क़ब्ज़ा है
चाहे जब खराब कर दें ज़मानें की हवा

कब तक चलेंगी प्रेत हवाएँ  ?


☘ ज स बी र   चा व ला













गौमाता संग सफर

गौमाता संग सफर
——————–

अर्थशास्त्र की खुली गलियों से गाय निकली
धर्म की तंग गलियों में घुसी
संविधान के पन्ने चबाती सँसद पहुँचीं
रँभाई
गोबर कर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया
जँभाई लेते कुछ साँसदों पर गोमूत्र के छींटे पड़े 
पवित्र हुए
राज्य सभा कि दर्शक दीर्घा में पहुँची
जुगाली की
सर्वोच्च न्यायालय की मुँडेर चढ़ी 
लालक़िले से राष्ट्र को संबोधित किया
रुआँसी भारतमाता लाईन में खडी थी
कौन माता बड़ी थी
कौए भूल गये अपनी 'काँव काँव' 
चिल्लाये 'काउ काउ'

सपना 'आउट आफ कन्ट्रोल' हो रहा था
रोका कट कट 
माता के संग सेल्फी ले ली फटाफट

जै गोमाता दी

☘ जसबीर चावला  

Friday, April 7, 2017

हिटलर नहीं मरते

हिटलर नहीं मरते
——————
हिटलर नहीं मरते 
पुन: पुन:लौट आते हैं 
नये कलेवर में नाजी विचारों के साथ

गोयबल्स भी नहीं मरते 
जब तक हिटलर रहेंगे
गोयबल्स भी रहेंगे 
कभी मीडिया के भेष में 
कभी धर्म के चोले में 
झूठ बार बार दुहराएँगे 
उसे ही अंतिम सच बताएँगे 
हिटलर कभी नहीं मरते

☘ जसबीर चावला 

Friday, March 31, 2017

एक गणतंत्र के अवशेष

एक गणतंत्र के अवशेष
————––———

सन इकत्तिस सौ सत्रह
खुदाई में गणतंत्र के अवशेष मिले 
संविधान के फटे पन्नों में लिपटे कुछ कँकाल मिले 
कौन थे ये मरने वाले
विद्वानों में गहरे मतभेद है
संविधान की रक्षा में शहीद हुए 
या असंवैधानिक ढंग से मारे गये लोग
क्या तब बुत बने बैठे रहते थे जज लोग

सभी विद्वान एकमत हैं
हजार साल पहले देश में संविधान था
भूलभुलैया सी संसद थी
सुंदर सा न्यायालय था


☘ जसबीर चावला 

Sunday, March 26, 2017

मैं सोच सकता हूँ

मैं सोच सकता हूँ
——————

मैं एक दिन तुमसे अपनी क़लम वापस छीन लूँगा 
फिर बोलूँगा लिखूँगा 
पुस्तकें पड़ूँगा 

तुम रिमोट से चलने वाले रोबोट हो 
सोच नहीं सकते

मैं सोच सकता हूँ

☘ जसबीर चावला 

बगुलाभगत

बगुलाभगत
 — • — 

बगुला भगत नहीं एकाग्र होता है
मछली साधना में रत होना
बगुले का सहज काम होता है 

बगुला गाली नहीं है
बगुला भगत में भगत गाली है

बगुले की भोंडी नकल है


वक्त काटना

वक्त काटना
————–

बँद करो भौंकना
बहुत भौंक चुके 
वक्त काटने का नहीं
काटनें का है 

☘ जसबीर चावला

तुम्हारा प्रेम

तुम्हारा प्रेम
————

तुम्हारा प्रेम
संकरी पगडंडी
मैं धूलि धूसरित हो जाता हूँ 
काँटों भरी राह
मैं लहूलुहान हो जाता हूँ
ठंडी हवा
मैं काँप काँप जाता हूँ
आसमानी बिजली
मैं सिहर सिहर जाता हूँ
बरसती बूँदे
मैं नहा नहा जाता हूँ
तुम्हारा प्रेम
बहता झरना
मैं डूब डूब जाता 
तृप्त हो जाता हूँ

अपराध बोध

अपराध बोध 
——•——

आत्मा नहीं कचोटती
आत्मा पर बोझ नहीं है
क्षमा नहीं माँगते
शर्मिंदा नही हैं

क्या वे अबोध हैं ?

उन्हें न बोध है 
न आत्मा है
इसीलिये ग्लानि बोध नहीं है

अछूत कौन है ?

बीमार मीडिया
 ——•——

हाँ हम अछूत हैं
छूना न हमें
तुम बीमार मानसिक रोगी हो 
छूत की बीमारी है तुम्हें

सच ! तुम छूत हो
छूना न हमें हम अछूत हैं 

Friday, March 24, 2017

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी

–————•————–


एक काल खण्ड ऐसा होगा


सँविधान का घोर उल्लँघन होगा

टुकुर टुकुर ताकते न्यायाधीश होंगे

सँसद मछली बाजार बनेगा

प्रधान संसद को अँगूठा दिखायेगा

विधायक और घोड़े मँडी में बिकेंगे

फ़सादी मवाली राज्य प्रमुख बनेंगे 

कारिंदे कठपुतली होगें

श्रेष्ठीवर्ग देश को ख़रीदे बेचेंगे

लोग जीवित होंगे मरे समान होंगे 

मरे लोगों को ऐसा जीने की आदत होगी

*

तुम्हे इन सब पर विश्वास हो तो हो

मुझे तो विश्वास नहीं फिर जो हो सो हो


          ☘ जसबीर चावला


Tuesday, March 21, 2017

शोकगीत

शोकगीत
———–

कोई मरे तो मरे
मेरी बला से
डर गया हूँ
और न डराओ 
पहले ही मर चुका हूँ

Friday, March 10, 2017

वे जब मार देंगे

वे जब मार देंगे
—————

वे जब मार देंगे 
औचित्य बता देंगे मारनें का 
वैसे उन्हे बतानें की जरूरत नहीं है 
बिना वजह भी मार देंगे
बेवजह मारना भी एक जायज़ वजह है
देवताओं से मिली है इन्हे मारने की सनद

धर्मग्रँथ

धर्मग्रँथ
——–

उठाये धर्मग्रँथ
चूमा आँखों से लगाये
सिर पर बैठाया
पढ़े तो कुछ समझ न आये
भगवान के एजेंट ने समझाये 
समझ आये
तुरंत लाइब्रेरी में रखवाये
आदि मानव के विकास के साक्षी है ग्रँथ

धर्मग्रँध लायब्रेरी में ही अच्छे लगते हैं 

कैसा न्याय

कैसा न्याय
————

न्याय होता नहीं
सभी के लिये
ये बना है
ये बना है
किसी किसी के लिये

न्याय होता नहीं 
सभी के लिये 

(संदर्भ असीमानंद/साईंबाबा पर अदालती फैसले/'इश्क होता नही सभी के लिये'-फिल्म 'जागर्स पार्क'-गायक अदनान सामी)

Monday, March 6, 2017

कवि का मन

___________
   कवि का मन
–––––––––––

डाल से पत्ता टूटा
कवि मन धड़का
कली चटखी
कवि बाग बाग हुआ
झील में मछली उछली
कवि मन बल्लियों उछला
गाय रँभाई
कवि को माँ याद आई

मुहल्ले में गोली चली
कवि व्यस्त था
जूड़े में गुलाब टाँक रहा था

  ☘ जसबीर चावला

Wednesday, March 1, 2017

कालिखो पुल


दुष्टकाल में फिर याद आ गया.9 अगस्त, 2016 को ईटानगर में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल ने फांसी लगा ली.किसी को याद है ? क्यों ? खुदकुशी करने के एक दिन पहले कालिखो पुल ने 60 पेज का एक सुसाइड नोट लिखा जिसमें उन्होंने जजों सहित संवैधानिक पदों पर बैठे विभिन्न लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. कभी कोई जाँच हुई ? क्या नतीजा निकला ? उनके पुत्र ने भी बाद में लंदन में आत्महत्या की.

—————
कालिखो पुल
————––

कौन है कालिखो पुल ?
मर कर उठी हुई उँगली का एक नाम 
एक नाम जो कोड़ा है
भ्रष्ट व्यवस्था के उघड़े तन पर
एक जायज़ गुस्सा 
विधायिका के गिरगिट चरित्र पर
सटीक टिप्पणी है संविधान पर
न्याय की बग्घी में बैठे जज साहिबान पर
हाथों में दिया चाबुक है
उलाहना है जज साहब बग्घी से उतरें 
चाबुक चलायें

एक प्रश्न चिन्ह है
बेबसी है फटकार है
मुँह छुपाते बेशर्म मिडीया पर
उसकी शातिराना चुप्पी पर
उनकी आत्म हत्या नहीं बलिदान है
हमारे चेहरे पर लगी कालिख है
कालिखो पुल के नहीं रहने पर

🦉जसबीर चावला



Monday, February 27, 2017

उठो तुतमखामुन



उठो तुतमखामुन उठो
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फैरो पैंतिस सौ सालों से ‘टूम्ब’ में थे  
‘किंग्स वैली’ मे 'मम्मी' बने
भूले इतिहास की तरह  
इजिप्ट के तपते लक्सर में खोये थे 

रेत की घाटी में बरसों खुदाई चली
आज भी चल रही है 
कई फैरो ढूँढे गये
उनके परिजन मिले
काहिरा के म्यूज़ियम में भेजे गये 
अब सब मज़े से काँच के ठंडे बक्सों में सो रहे 

उन्निस साल का तुतमखामुन 
'किंग्स वैली' में अकेला रह गया
उन्निस सौ बाईस में खोजा गया
'मम्मी' बना आज भी मक़बरे में वहीं सोया है 
उसे देख इच्छा हुई पुकारूँ 
देखो सब चले गये 
उठो 'तुतम' बहुत सो चुके अब उठो
तुम भी काहिरा जाओ
अपना शाही खजाना देखो
सोने के एक सौ दस किलो के ज़ेवर देखो
ग्यारह किलो सोने का मास्क देखो
वाईन भरे छत्तीस जार देखो
खाने इत्र तेल के भंडार देखो
शानदार कपडे पहन कर वाईन पियो 
हाथी दाँत जड़ी सोनें की छड़ियाँ उठाओ 
सोने के सिंहासन पर बैठो
अपने ताबूत रथ देखो
मकबरे का खजाना कब काम आयेगा 
इतना सोना तो 'किंग्स वैली' में क्यों अकेले सोना
कितने मिलियन डालर का है सोना ?

पिता अखनातन को पुकारो 
क्वीन 'नेफरटिटी' को पुकारो
'क्वीन वैली' से 'नेफरतारी' भी आई हैं 
बंद 'मम्मीयों' को जगाओ
कहो सजो सँवरो बाहर आओ

काँच के  के बक्सों में 'मम्मियाँ' क्यों चुपचाप पड़ी हैं
प्रजा टिकिट लिये सबको देखनें बाहर खड़ी है

(अपनी इजिप्ट यात्रा से उपजा ज्ञान.)

🦉 जसबीर चावला



मैंने कुछ पेड़ों को देखा है


मैंने कुछ पेड़ों को देखा है
—————————

केलिंफोर्निया के जंगलों में गगनचुंबी पेड़ देखे
दो सौ दस फुट का 'ग्रीजली जायंट' 
उसे छुआ महसूस किया 
अभिभूत हुआ
निहारता रहा एकटक
अपनी लघुता का अहसास हुआ
दो सौ पचहत्तर फुट का रेडवुड 'जर्मन शेपर्ड' 
तीन सौ अस्सी फुट का ऊँचा रेडवुड 'हायपरिअन' 
नंबर वन का ख़िताबी
तीन हजार सालों से धरती पर खड़ा है 
व्हाइट माउंटेन  पर 'ब्रिस्टलकोन पाईन' 
पाँच हजार साल का 'वरिष्ठतम पेड़' 
झुक कर खड़ा है
उम्रदराज़ और भी पेड़ हैं दुनियाँ में 
दुआ है सलामत रहैं
🌳
चैतन्य पेड़ों ने क्या नहीं देखा 
गुरुग्रँथ / कुरान / बाइबल पढ़े
कबीर से गौतम को देखा
तुतमखामुन / क्लियोपेट्रा / अलेक्ज़ेंडर  देखा
मेसोपोटामिया / सिंधुघाटी देखी
इजिप्ट / रोम की / सभ्यता देखी
सभ्यताओं के उदय / अवसान के साक्षी बने 
संसार के धर्मयुद्ध / महायुद्ध देखे
हिटलर देखा गाँधी देखा
जीवन/ मृत्यु / विस्थापन देखा
चेतना के प्रतीक खड़े पेड़
काश की कुछ बोल पाते पेड़ 

पेड़ों ने बहुत कुछ देखा है
मैंने बस कुछ पेड़ों को पहचाना है 
कुछ पेड़ों को देखा है 

☘ जसबीर चावला




Wednesday, February 15, 2017

बुधिया क्या सोचता है

बुधिया क्या सोचता है
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दस बरस का हुआ बुधिया 
मन में क्या सोचता बुधिया

जूठे कप धो रहा बुधिया
सिर पर इँटे ढो रहा बुधिया
झाड़ू देता गाली खाता
ट्रेनों में जूते चमकाता
पानी की बोतल बीनता
पलास्टिक की पन्नी चुनता
अधनंगे बदन की फुँसियां खुजलाता 
बुधिया क्या सोचता है 

'व्हाइटनर' का नशा करता बुधिया
मालिक की जाँघों में भिंचा बुधिया
सोलह के पहले ही बुधिया 
अंतिम साँसे लेता बुधिया
छोटू रामू गंगू मंगू
कितने नाम धरे है बुधिया
बुधिया कुछ नहीं सोचता है

गाँव खबर कर दो हरिया को 
जल्दी भेजे दूसरे बुधिया को


(World Day Against Child Labour 12 June)


Wednesday, February 8, 2017

केक्टस लगाने वाले



केक्टस लगाने वाले

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हजार बरस पीछे अतीत में गये
नाकाम कोशिश की क़लम लगानें की 
न बीज बो सके
न पौधे रोप सके

इतिहास की मुँडेर पर जा बैठे
लगा दी केक्टस की शाखा
खूब फलफूल रही है
अब घर घर में नागफनी फ़न काढ़े खड़ी है

🦉 जसबीर चावला 






   
   

Sunday, February 5, 2017

खोदा पहाड़

खोदा पहाड़ 
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विमुद्रीकरण किया है
अब मुद्रीकरण करो
खूब हिनहिनाये हो
अब लीद भी करो

प्रभु मेरे अवगुण चित न धरो

Thursday, February 2, 2017

मैं प्रेम की कविता नहीं लिखता

मैं प्रेम की कविता नहीं लिखता
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पागल   भीड़   गाय  ढूँढनें  फ्रिज  में  घुसे 
फ्रिज      मालिक    मार    दिया     जाये
अदालत     आदमी    की      जात    देखे
हत्यारा     ज़मानत     पर      छूट    जाये  
कुर्सी   पर    बैठा  बड़ा   चेहरा  देख  कर 
ऊँचे   जज  की   आँख  'नीची'   हो  जाये

'जेएनयू' से सरेआम छात्र लापता हो जाये 
आस्मां   खा    जाये  जमीन  निगल  जाये
बैंक  कि   क़तार  में   औरत   बच्चा   जनें
खड़े     खड़े   क़तार   में  बूढ़ा   मर   जाये

मरे  ढोर    की  खाल   उतारनें  के  जुर्म में
दलितों  की  नंगे  बदन मुश्कें  कसी  जायें
खाल   के    बदले   खाल    उतारी   जाये 

चटख रंग केनवास पर कैसे लगा सकते हो
तुम प्रेम की  कविता  कैसे  लिख सकते हो 

Saturday, January 28, 2017

समुद्र मंथन अब

समुद्र मंथन अब :अमृत काल 
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विकास के समुद्र मंथन में छल आज भी हुआ
नाम 'आम' आदमी का लिया
वैश्विकरण के अनुष्ठान में हाशिये बैठाया
विचार विहीन मंथन हुआ
दुंदुभि बजी प्रचार हुआ
रत्नों का ज़ख़ीरा निकला
स्विस बैंक के लाकर की चाबी
करंसी चेस्ट नोटबंदी
कुर्सियाँ कोयला खदानें
गैस खनिज भंडार स्काच
रियल एस्टेट  स्पेक्ट्रम
हथियारों के सौदे स्मार्ट सीटी बुलेट ट्रेन
धर्म योग पतंजलि को बेचते बाबा व्यापारी
वियाग्रा जापानी तेल थाई मसाज

मंथन की साझेदार हुई विदेशी कंपनियाँ
अपराधी नौकरशाह नेता उद्योगपति
अंबानी अदाणी भगोड़े माल्या मोदी
झूठ उगलते टीवी
सरकारी भोंपू अखबार 
'सेज' की सजी समिट में तश्तरी लिये सरकारें

मंथन में कुछ सुमरनियां भी मिली
बीस सूत्रीय ग़रीबी हटाओ फ़ीलगुड
मस्जिद  हटाओ सरकारी मंदिर बनाओ 
मंडल लाओ  कमंडल हटाओ
किसानों की रामनाम सत्य की आवाज़ें
बीफ और साम्प्रदायिक ज़हर
कुछ साफ्टवेयर नौकरियाँ
सत्तर वर्ष के जवान सपने
मनरेगा बीपीएल कार्ड
खजुराहो सेफई महोत्सव
प्रधानमंत्री की अविराम रैलियाँ 
बलात्कारी हत्यारे रहीम आसाराम  
राधे माँ साध्वियाँ
लाड़ली योजना मुफ्त तीर्थ यात्रा

चंद सुख के टुकड़े उछले
मध्यवर्ग लगा माला फेरने
जोड़ने लगा ईएमआई
टकटकी बांधे ताकती आँखें

विकास का शोर अभी थमा नहीं
क्लाइमेक्स क्या होगा पता नहीं 

Friday, January 27, 2017

कैसा हो न्याय

कैसा हो न्याय
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न्याय के कँधे मज़बूत हों
रीढ़ तनी 
गर्दन उठी हो
आँख में संवेदना
क़लम की स्याही में संविधान घुला हो

क्योंकि न्याय अभी भी संभावना है

Friday, January 13, 2017

न्याय के काँपते हाथ



न्याय के काँपते हाथ 
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न्याय की देवी ने पट्टी खिसकाई
एक आंख खोली
कुर्सी का चेहरा दिखा 
देवी के हाथ काँपे
तराज़ू के पलड़े कुर्सी की ओर अपने आप झुक गये
कुर्सी ने आँख झपकाई
न्याय आश्वस्त हुआ
निवृत्ति बाद का बंदोबस्त हुआ

क्या न्याय अभी भी संभावना है ?


Wednesday, January 11, 2017

चोर कुत्ता संधि

चोर कुत्ता संधि
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कुत्ते खूब भौंक रहे
रात दिन भौंक रहे
'चोरों-कुत्तों का गठबंधन हुआ
चोर कुत्तों को टुकड़ा डालेंगे
चोर इस गली में चोरी करेंगे
कुत्ते दूसरी में भौंकेंगे

दोनों खुश हैं
रोज हो रही चोरियाँ
खूब भौंक रहे कुत्ते

☘ जसबीर चावला

Tuesday, January 10, 2017

हाथों के तोते क्यों नहीं उड़ते

जिनके हाथों के तोते नही उड़ते 
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इनके हाथों के तोते नहीं उड़ते
उड़ें कैसे 
आत्मग्लानि हो 
आँख में पानी हो 
दिल में संवेदना हो 
तो उड़ते हैं तोते 
         🔶
पँख नोंच दिये तोतों के 
लोकतंत्र की पीठ में भोंका ख़ंजर 
मौत की कतार हो या क़तार में मौत 
बुतों के चेहरों पर शिकन नहीं आती
उड़ नहीं सकेंगे परकटे तोते 
इनके हाथों के कब उड़ेंगे तोते ?

☘️ ज स बी र   चा व ला




Thursday, January 5, 2017

ओह ! नो मोर केलिगुला

औह ! नो मोर केलिगुला
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केलिगुला / कौन था
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रोम का तीसरा सम्राट
जायस सीज़र उर्फ़ लिटिलबूट उर्फ केलिगुला  
सन बारह में जन्मा सैंतिस में सत्ता संभाली 
इकतालिस में चल बसा 
कुल उन्तीस साल जिया
तीन साल दस महिनें राज किया
केलिगुला ने सत्ता के लिये सब किया
सत्ता की खुशी में एक लाख साठ हजार जानवरों की बलि दी 
सत्ता संघर्ष में मार्कों ने उसे शासक घोषित करवाया 
उसने मार्कों और चचेरे भाई दोनों को ही मरवाया 

केलिगुला / क्रूरता
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खूब रक्तपात किया
एक लेखक को जिंदा जलाया 
ऊंची आवाज में पक्ष रख रहे रोमन नाईट की ज़बान काट दी
बच्चों की फाँसी देखनें उनके अभिभावकों को बुलाया
फाँसी बाद उन्हें भोज पर आमंत्रित किया 
शक्की झक्की मिज़ाज का था
किसी की सुनता नहीं था
दादी की किसी सलाह पर पलट कर तीखी ज़बान से बोला 
"स्वयंभू हूँ मैं अधिकार है किसी के साथ कभी भी कुछ करने का"
नाम की समानता से गलत आदमी को फाँसी चढ़ाया 
पछतानें के बदले उसने अमर वाक्य कहा
"उनको मुझसे नफरत करनें दो वे डरेंगे मुझसे"
मृत्युदंड सुनाये लोगों की सूची पर हस्ताक्षर कर बोला
'कर रहा हूँ खाता बही साफ इनका'
बोलने और व्यवहार दोनों में कूर था केलिगुला 
अपने बनाये तैरते पुल पर लोगों को बुलाया
पानी में धक्का देकर डुबो दिया
नक़ली लडाई में ग्लेडियटर के हाथ लकड़ी की तलवार दी
उसके गिरते अपनी असली तलवार उसके सीनें में उतार दी

प्रिय थी उसे हिंसा
शिकारी जानवरों के लिये मँहगे हुए भेड़ बकरी
जेल से विचाराधीन बंदी बुलवाये
एरिना में हिंस्र जानवरों के सामने उन्हें फिंकवाये
वे टूट पड़ते बोटी बोटी कर देते 
केलिगुला खुश होता
परेशान था एक बार बंदियों की कमी से
ढेरों दर्शक ही फिंकवा दिये स्टेडियम से 

केलिगुला / निर्मम
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आधारहीन आरोपो में कुलीनों को पिंजरें में बंद करवाता
भवन निर्माण रोड कार्य में लगाता
सार्वजनिक रूप से अपमानित करता 
बेड़ियों से जकड़ प्रदर्शन करता 
निंदा करता आरे से चिरवा देता 
सीनेटरो को औक़ात दिखाने रथ के सामने दौड़ाता

केलिगुला / विलासिता
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केलिगुला भोग विलास में जिया 
आलीशान महल बनवाये
दो भव्य जहाज़ बनवाये
'टिबरिस सीज़र' द्वारा ख़ज़ाने में छोड़े अरबों 'सेस्टर्स' फ़िज़ूल उड़ाये
दो दिनों की जरूरत थी
दो मील लंबा नावों का तैरता पुल बनवाया 
छक कर सेक्स किया 
सीनेटरों की बीबीयों को भोगा
बहनों पर भी आसक्त हुआ
उन्हें लोगों की अँकशायनी बनाया 
अपनें नाम के सिक्के चलवाये
फैंसी ड्रेस पहनी ढेरों कपडे बनवाए 
कवि होमर की रचनाएँ नष्ट की
वकीलों को धमकियाँ देकर नाराज किया

केलिगुला / कर वसूली 
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कई कर लगाने की घोषणा की
लोग  'करादेश' पढ़ न सकें
जानबूझ कर छोटे अक्षरों में छापा
जान न सके उसे संकरी गलियों में रखा
धन उगाही के नये हथकंडे अपनाये 
शादी वैश्यावृत्ति पर भारी टेक्स लगाये
महल में ही वैश्यालय बनवाया
'ग्लेडियर शो' में मौत / जीवन को निलाम किया
प्रजा की संपत्ति हड़पी
लूट मार कर ख़ज़ाना भरा
किसी सामँत को खानें पर बुलाकर सम्मानित किया 
दो लाख सेस्टर्स एेंठ लिये 
अपनी बेटी होने पर पोषण / शादी के लिये उपहार माँगे 
नये साल पर भी उपहार माँगे

केलिगुला / आत्म मुग्ध कुरूप 
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पीली रंगत लंबा कद आत्ममुग्ध था 
लेकिन खुद पर ग़ुरूर था
शरीर पर थे बकरी से बाल 
बकरी नाम पर लोगों को मिलती भारी सजा 
आईने के सामने खड़ा घंटों बुरी बुरी शक्लें बनाता था 
देखनें वालों को डराता था

विचार शरीर से तारतम्य नहीं मिला पाता था
एक तरफ चरम क्रूर दूसरी तरफ डरपोक था
अजीबोगरीब परिधान पहनता
महिलाओं से जूते
कभी विजयी जनरल की ड्रेस पहनता

साहित्य से उसका लगाव न था 
भाषण के प्रति जबरदस्त लगाव था
सदेव भाषण के लिये तैयार रहता 
किसी के विरुद्ध आरोप के समय वाचाल होता 
नाटकीय अंदाज से ऊंचे स्वरों में बोलता 
स्थिर खडा न हो सकता
महल में अजीब क़िस्म की दावतें करता 
सिरका में भंग मोती पीस के डालता 

केलिगुला / धरती पर खुदा 
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केलिगुला को भी धरती पर अपने खुदा होनें का यक़ीं था 
देव मूर्तियों के सिर कटवाये
उनके धड़ों पर अपनें सिर लगवाये
प्रसिद्ध लोगों की मूर्तियों को ध्वस्त किया
किसी और की मूर्ती न लगे आदेश दिया 
वाचनालयों से हटा दी 'वर्जिल' 'टाइटस' की प्रतिमा
खुद को 'वीनस' कभी 'जुपिटर' माना 
कभी 'मार्स' कहा कभी 'हरक्यूलिस' माना 
अपना मंदिर महल में ही बनवाया
रोम में तब मृत्युपरांत पूजा का चलन था
खुद को जीते जी पुजवाया
मंदिर में लगाई अपनी सोने की आदमकद मूर्ति 
नित नये कपड़े पहिनाने लगा
रातों में उठकर चाँद से बात करने लगा
खुद को घोषित कर दिया नया सूर्य 
धर्म को राजनीति में लाया
सीनेट की अवहेलना कर तानाशाही रवैया अपनाया  
प्रिय घोड़े 'इनस्सियाट्स' को सीनेटर बनाया 
उसे धर्मगुरू का दर्जा दिया
'ओबेलिस्क' मँगवाया इजिप्ट से 
जो आज भी खड़ा है 'वेटिकन' मे

केलिगुला / अन्य समुदाय
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रोमनों के यहूदियों से सदैव अच्छे सँबंध रहे
केलिगुला ने उन्हे ललकारा
चुनौती दी उनकी जातीय धार्मिक पहचान पर
उन पर भारी टेक्स लगाकर
सदियों से 'टेंपल आफ यरुशलम' यहूदियों का पवित्र स्थल था 
केलिगुला ने प्रयास किया अपनी मूर्ति लगानें का 
यहूदियों के रोम से सँबंध बिगड़े
सदियों तक बिगड़े रहे 
पूर्वजों से रोम की जिन्हे विधिवत नागरिकता प्राप्त थी 
केलिगुला ने देश से बेदख़ल किया
छीन ली उनकी संपत्तिसेना को अनावश्यक भेजा
बिना लड़े सैनिक हेलमेट में सीपियाँ भर लाये
नाटकीय प्रचार हुआ 
देखो केलिगुला ने इंग्लेंड को हरा दिया 

पोने चार साल केलिगुला ने शासन किया 
इतिहास में उसे पगला कहा 
किसी ने मनोरोगी सनकी कहा 
किसी ने कुशल अभिनेता 
किसी ने निर्मम हत्यारा कहा
उसके सुरक्षा गार्ड तब कुछ न कर सके
अपने ही सैनिकों द्वारा महल में मारा गया 

केलिगुला कहता था वह धरती पर खुदा है
मर कर पता चला कि वह नहीं खुदा है