दुष्टकाल में फिर याद आ गया.9 अगस्त, 2016 को ईटानगर में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल ने फांसी लगा ली.किसी को याद है ? क्यों ? खुदकुशी करने के एक दिन पहले कालिखो पुल ने 60 पेज का एक सुसाइड नोट लिखा जिसमें उन्होंने जजों सहित संवैधानिक पदों पर बैठे विभिन्न लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. कभी कोई जाँच हुई ? क्या नतीजा निकला ? उनके पुत्र ने भी बाद में लंदन में आत्महत्या की.
—————
कालिखो पुल
————––
कौन है कालिखो पुल ?
मर कर उठी हुई उँगली का एक नाम
एक नाम जो कोड़ा है
भ्रष्ट व्यवस्था के उघड़े तन पर
एक जायज़ गुस्सा
विधायिका के गिरगिट चरित्र पर
सटीक टिप्पणी है संविधान पर
न्याय की बग्घी में बैठे जज साहिबान पर
हाथों में दिया चाबुक है
उलाहना है जज साहब बग्घी से उतरें
चाबुक चलायें
एक प्रश्न चिन्ह है
बेबसी है फटकार है
मुँह छुपाते बेशर्म मिडीया पर
उसकी शातिराना चुप्पी पर
उनकी आत्म हत्या नहीं बलिदान है
हमारे चेहरे पर लगी कालिख है
कालिखो पुल के नहीं रहने पर
🦉जसबीर चावला
No comments:
Post a Comment