Sunday, March 26, 2017

तुम्हारा प्रेम

तुम्हारा प्रेम
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तुम्हारा प्रेम
संकरी पगडंडी
मैं धूलि धूसरित हो जाता हूँ 
काँटों भरी राह
मैं लहूलुहान हो जाता हूँ
ठंडी हवा
मैं काँप काँप जाता हूँ
आसमानी बिजली
मैं सिहर सिहर जाता हूँ
बरसती बूँदे
मैं नहा नहा जाता हूँ
तुम्हारा प्रेम
बहता झरना
मैं डूब डूब जाता 
तृप्त हो जाता हूँ

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