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कवि का मन
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डाल से पत्ता टूटा
कवि मन धड़का
कली चटखी
कवि बाग बाग हुआ
झील में मछली उछली
कवि मन बल्लियों उछला
गाय रँभाई
कवि को माँ याद आई
मुहल्ले में गोली चली
कवि व्यस्त था
जूड़े में गुलाब टाँक रहा था
☘ जसबीर चावला
कवि का मन
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डाल से पत्ता टूटा
कवि मन धड़का
कली चटखी
कवि बाग बाग हुआ
झील में मछली उछली
कवि मन बल्लियों उछला
गाय रँभाई
कवि को माँ याद आई
मुहल्ले में गोली चली
कवि व्यस्त था
जूड़े में गुलाब टाँक रहा था
☘ जसबीर चावला
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