Thursday, December 26, 2019

कांटे

काँटे
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अपने पाँव से निकालूँ मैं कितने काँटे 
राह में कोई काँटे बिछाता चला गया

बेचारे नौ डंडे

बेचारे नौ डंडे
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डंडे चले,ख़ूब चले
कई बाज़ू तोड़े 
टाँगें तोड़ी,सर फोड़े
नहीं बख्शे गये
माँ बहन,बच्चे बूढ़े  
टूटे दरवाज़े खिड़की
टीवी,वाशिंग मशीन,काँच तोड़े
कार,स्कूटर नहीं छोड़े 

बरसे,जमकर खूब बरसे 
थक कर चूर हुए डंडे 
आख़िर खुद ही टूट गये
शहीद हो गये बेचारे डंडे

☘️ जसबीर चावला 

( उत्तर प्रदेश सरकार नौ टूटे डंडों की क़ीमत आंदोलनकारियों से वसूलेगी )

Thursday, December 19, 2019

नया साल:पुराना साल


नया साल:पुराना साल
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दरवाज़े की चौखट पर नया साल खड़ा था
पीछे मुड़ कर देखा
पुराना ख़ाकी पहने पिछले दरवाज़े से बाहर निकला
छोड़ गया कड़वी यादें
गोलियों के निशान
*
आश्वस्त करे नया साल
पुराने का सहोदर न हो
देश में कुछ रंग भरे
कुछ महक बिखेरे

☘️ जसबीर चावला

Monday, December 16, 2019

लायब्रेरी में लाठी

लायब्रेरी में लाठी
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            लाठी की आँख नहीं होती
                      पुस्तकें नहीं पढ़ती
                      सोचती नहीं लाठी
          लाठी का रिश्ता जिस्म से है
                    सत्ता का हाथ लाठी
             तन/मन पर जख्म छोड़ती
        जामिया की लायब्रेरी में घुसी
           संविधान की धज्जियाँ उड़ी
                             परंपरा निभाई
            निहत्थों की जमकर धुनाई
              अपना धर्म निभाती लाठी

☘️ जसबीर चावला





जनता का गुलदस्ता

जनता का गुलदस्ता
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नेता ने जनता से गुलदस्ता हाथों हाथ लिया
पास खड़े हाथों ने थामा 
उनसे अन्यों ने लिया 
कूड़े में डाला
जनता का यही हश्र हुआ
बिसरा दिया

नाराज़ भेड़ें और भेड़िया

नाराज़ भेड़ें और भेड़िया
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चरवाहे से भेड़ें नाराज़ थी 
घास कम खिलाता है
मूँड़ता खूब है 
कुत्ते से हाँका डलवा कर दौड़ाता है

घाघ भेड़िया सामने आया
भेड़ों का बाना पहना 
मुँह में तृण रखा
क़सम खाई दुख दूर करेगा 
भेड़ों ने भेड़िये को नेता चुन लिया

अब भेड़ों को नींद हराम हुई 
उठ उठ कर गिनती करती भेड़ें 
अट्टहास कर रहा भेड़िया 
भेड़ चाल भी भूल गई भेड़ें 

🦉 जसबीर चावला 



Tuesday, December 3, 2019

पीठ पर हिंदुस्तान

पीठ पर हिंदुस्तान 
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पीठ पर जो लाठी के निशान हैं
छपा हुआ मेरा देश हिंदुस्तान है

पीठ पर संविधान
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सिर फूटा,टाँग टूटी,पीठ पर लाठी निशान है 
वर्तमान का दस्तावेज हैं,देश का संविधान है 

               ☘️ जसबीर चावला

आव्हान जंतर मंतर आओ

आव्हान : जंतर मंतर आओ 
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आँसू गैस की कमी नहीं 
डंडे भी खूब हैं
पेलेट गन पर्याप्त हैं
देश आत्म निर्भर हुआ 
हर्ष का विषय है

जनता बाहर आओ
जंतर मंतर पर तुम्हारा स्वागत है