नाराज़ भेड़ें और भेड़िया
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घास कम खिलाता है
मूँड़ता खूब है
मूँड़ता खूब है
कुत्ते से हाँका डलवा कर दौड़ाता है
घाघ भेड़िया सामने आया
भेड़ों का बाना पहना
मुँह में तृण रखा
क़सम खाई दुख दूर करेगा
भेड़ों ने भेड़िये को नेता चुन लिया
अब भेड़ों को नींद हराम हुई
उठ उठ कर गिनती करती भेड़ें
अट्टहास कर रहा भेड़िया
भेड़ चाल भी भूल गई भेड़ें
🦉 जसबीर चावला
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