Monday, July 31, 2017

ताजमहल और हमारी संस्कृति

ताजमहल और हमारी संस्कृति 
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गवर्नर जनरल बेंटिंक नें ढेरों सुधार किये
सती प्रथा रोकी
बाल / बहु विवाह रोके 
ठगों को फाँसी लटकाया
अदालतों के ढंग बदले 

चरम घाटे में थी तब अर्थ व्यवस्था 
क़िले का बचा मार्बल बेचा
अकबर की प्रसिद्ध तोप तोड़ कर बेची 
सोचा ताजमहल भी गिरा दूँ 
मार्बल को इंग्लेंड बेच धन कमा लूँ 

सच उसने भूल की जो न तोड़ा 
ताज टूटता 
ओने पौने बिक जाता
संस्कारित सरकारें आज परेशान न होती 
ताजमहल को अछूत घोषित करनें से बच जाती.

(लॉर्ड विलियम बेंटिंक,देश का गवर्नर जनरल 1828)

Saturday, July 29, 2017

जोसफ़ रुडियार्ड किपलिंग फिर पधारो म्हारे देस

कोरोना वायरस : जोसफ़ रुडियार्ड किपलिंग फिर पधारो म्हारे देस
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किपलिंग तुमने लिखा था
'भारत साधुओं सँपेरों का देश है'
देश उससे बहुत आगे आ गया है

गाय ने तय किया देश का एजेंडा
भगवा ने तिरंगे को ढक दिया
सत्ता के मल कुण्ड में आकँठ डूबे साधु
दिनरात पंतजलि को बेचते साधु
प्रकृति का विनाश करते साधु
सितारा आश्रमों में रहते  साधु
रास लीला कर जेल जाते साधु
गर्भ में ‘पुत्रबीजक’ रोपते साधु
संभोग में समाधि तलाशते साधु
साधु साधु साधु साधु

मंत्र शक्ति से विमान उड़ते
विमानों में रिवर्स गियर लगते
कोरोना का इलाज गोबर गोमूत्र से हो रहा 
विकिरण को गोबर समाप्त कर रहा
ज्योतिष अस्पताल में मरीज़ की अंतिम घड़ियाँ गिन रहा
विज्ञान धर्म के द्वार चिलम भर रहा 
सारा देश नागिन डाँस कर रहा

किपलिंग तुम मुंबई में जन्में फिर आओ
गोबर स्नान करो
गोमूत्र पान की मुफ़्त सुविधा एअरपोर्ट पर पाओ
'वेस्टमिनिस्टर' में तुम्हारी कब्र पर मैंने इन्विटेशन रखा है 
केसरिया बालम पधारो म्हारे देस 
‘किपलिंग फिर पधारो म्हारे देस’

☘️ जसबीर चावला

Monday, July 24, 2017

काठ की हाँड़ी



काठ की हाँडी 
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नहीं चढ़ती दुबारा काठ की हाँडी 
न चढ़े 
गोदाम भरे हैं 
छोड़ देंगे नया शिगूफ़ा 
सुना देंगे एक और जुमला
चढ़ा लेंगे दूजी काठ की हाँड़ी
जय बाबा केदारनाथ की

🦉 ज स बी र  चा व ला 
                
(एंबुलेंस वाला ड्रामा गुजरात के बाद हिमाचल में भी !)

                

क्या फर्क है जुनेद और बब्बल में

क्या फर्क है जुनेद और बब्बल में 
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जुनेद तुम ऐन ईद के वक्त रुखसत हुए
बिना सलाम बिना ईदी लिये
तुम्हारा घर बेघर हुआ 
जो सैंवईयाँ लाये थे कभी नहीं पकेंगीं
इस घर में अब ईद कैसे मनेगी

हमारा 'बब्बल' भी चौरासी में ऐसे बिदा हुआ 
अट्ठारह का बब्बल
अमृतसर से मत्था टेक लौट रहा था 
परिजनों सहित ट्रेन में मारा गया 

हत्यारे कभी पकड़े नहीं गये
क्या तुम्हारे पकड़े जायेंगे ?
हत्यारे चेहरा नहीं मुखोटा है 
चाबी वाले बिना दिमाग के गुड्डे
हत्यायें नीतिगत विचार है
एक सोचा समझा फैसला 
हत्यारे फ़रार नहीं आस पास है

तुम आज जिंदा होते
अगर नाम जुनेद नहीं जगन होता 
दाढ़ी,गोल टोपी न होती
बब्बल का नाम बलराम होता
सिर पर बँधा पटका न होता

देश की दशा

देश की दशा
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देश चल नहीं रहा
बुरी तरह हिल रहा 
बुनियाद हिल रही 
आँखें खोलो
थाम सको तो थाम लो 

जैसा तुम चाहो

जैसा तुम चाहो 
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नवाज़े     जायेंगें
जो सर झुकायेंगे

कुचले     जायेंगे 
जो  सर  उठायेंगे 

सर  आप  का है
चाहे       झुकायें
चाहे         उठायें

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जैसा तुम चाहो
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सर पर बिठाया जायेगा 
नवाज़ा जायेगा 
जो हाँ में हाँ मिलायेगा

कुचला जायेगा 
नेस्तनाबूद होगा
जो सर उठायेगा 

सर  भी  आपका 
मर्जी भी आपकी

कैसे कैसे लोग

कैसे कैसे लोग
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साँचे  में  ढले  लोग
एक सी  चाल ढाल
एक सा क़दम ताल
हाथों में ख़ंजर लिये 
एक  खाँचे में  फ़िट 
घुटनें में सिर लगाये
हाय राम  कैसे  रोग
कौन ये बिमार  लोग