क्या फर्क है जुनेद और बब्बल में
———————————
जुनेद तुम ऐन ईद के वक्त रुखसत हुए
बिना सलाम बिना ईदी लिये
तुम्हारा घर बेघर हुआ
जो सैंवईयाँ लाये थे कभी नहीं पकेंगीं
इस घर में अब ईद कैसे मनेगी
हमारा 'बब्बल' भी चौरासी में ऐसे बिदा हुआ
अट्ठारह का बब्बल
अमृतसर से मत्था टेक लौट रहा था
परिजनों सहित ट्रेन में मारा गया
हत्यारे कभी पकड़े नहीं गये
क्या तुम्हारे पकड़े जायेंगे ?
हत्यारे चेहरा नहीं मुखोटा है
चाबी वाले बिना दिमाग के गुड्डे
हत्यायें नीतिगत विचार है
एक सोचा समझा फैसला
हत्यारे फ़रार नहीं आस पास है
तुम आज जिंदा होते
अगर नाम जुनेद नहीं जगन होता
दाढ़ी,गोल टोपी न होती
बब्बल का नाम बलराम होता
सिर पर बँधा पटका न होता
———————————
जुनेद तुम ऐन ईद के वक्त रुखसत हुए
बिना सलाम बिना ईदी लिये
तुम्हारा घर बेघर हुआ
जो सैंवईयाँ लाये थे कभी नहीं पकेंगीं
इस घर में अब ईद कैसे मनेगी
हमारा 'बब्बल' भी चौरासी में ऐसे बिदा हुआ
अट्ठारह का बब्बल
अमृतसर से मत्था टेक लौट रहा था
परिजनों सहित ट्रेन में मारा गया
हत्यारे कभी पकड़े नहीं गये
क्या तुम्हारे पकड़े जायेंगे ?
हत्यारे चेहरा नहीं मुखोटा है
चाबी वाले बिना दिमाग के गुड्डे
हत्यायें नीतिगत विचार है
एक सोचा समझा फैसला
हत्यारे फ़रार नहीं आस पास है
तुम आज जिंदा होते
अगर नाम जुनेद नहीं जगन होता
दाढ़ी,गोल टोपी न होती
बब्बल का नाम बलराम होता
सिर पर बँधा पटका न होता
No comments:
Post a Comment