Thursday, February 18, 2016

आपका बाप कौन है

आपका बाप कौन है
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मेमने का बाप कौन था
उसके बाप का बाप कौन था
उसका बाप तय करेंगे हम
तय हम करेंगे कि मेमने का क़ुसूर क्या है
सजा किस मेमने को देना है
गवाह भी हमारे होंगे
पैरवी भी करेंगे हम 
फैसला भी करेंगे हम 
जो पहले ही तय है

बात मेमने की ही नहीं है
बात भेड़ियों की है
बात आप की है



Tuesday, February 16, 2016

पीठ न दिखाईये

पीठ न दिखाईये
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वे घेरे में पीट रहे थे
वे घेरे में पिट रहे थे
घेरे में खड़ों की पीठ पिटनें वालों की तरफ थी
तमाशबीन होकर भी अनजान थे
उन्होंने न कुछ सुना न देखा
न गवाही दी

जब ये घेरे में होगें
कोई नहीं देखेगा
कोई नहीं सुनेगा
कोई नहीं बोलेगा
सब तमाशबीन होंगे
सबकी पीठ होगी पिटने वालों की तरफ

पीठ न दिखाईये
मुक्का दिखाईये

Sunday, February 14, 2016

इन्द्रप्रस्थ का जंगल

चुनाव में इन्द्रप्रस्थ का जंगल
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सत्ता के पीछे पागल शेर तेंदुए 
मुर्दाखोर गिद्ध भेडिये
देश निगलते मगरमच्छ अजगर 
सबका दाँव जंगल की सत्ता पर 
रोम में चलेगा रोम का क़ानून 
यहाँ नहीं चलता जंगल का क़ानून 
सत्ता की बंदरबाँट चलती है
रेवड़ों की अदला बदली चलती है
नीलगाय और तेंदुओं की जुगलबंदी
हँसते लकडबग्घों बिगड़ैल हाथियों की संधि
एक बेड़ा भालू बाघ बकरी को लगायेगा पार
शेर खरगोश दोनों करते 
हिरण का शिकार 
जंगल में हर समय सेक्स शिकार होता है 
यहाँ का हर जानवर अबाउट टर्न होता है
देखा है ना टीवी पर जानवरों के दंगल को
चुनावी मौसम में 'इन्द्रप्रस्थ' के जंगल को
हाँफता सनसनी फैलाता विकट जंगल
हिंस्र गुर्राहटें कातर आवाज़ों का जंगल

Sunday, February 7, 2016

नस्लवादी

नस्लवादी

कोई भेड़िया जो खटखटाये
बेखौफ खोल देना दरवाज़ा
पनाह देना उसे
नस्लवादी कहीं पास ही होंगे
शिकंजे हैं उनके पास
रात दिन पीछा करते है
मार देगे उसे
भेड़िये को बचाना उनसे

जसबीर चावला

Saturday, February 6, 2016

अशोक का प्रायश्चित

अशोक का प्रायश्चित
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(जूनागढ़ गुजरात पर लिखी १३ वीं राजाज्ञा)

क्या कसूर था कलिंग का 
यही कि कलिंग गणतंत्र था
हर धर्म जाति के लोग
लोकतांत्रिक व्यवस्था
यही कसूर था कलिंग का.

अशोक ने युद्ध भूमी देखी
गलियों में नोचते गिद्ध देखे
लाख लोगों की मौत देखी
हर तरफ आगज़नी हाहाकार 
भागती महिलाएँ रोते बच्चे देखे.

उसे याद आई मैदान में बिलखती वह महिला
झकझोर कर पूछती उससे
क्या दोष था उन सबका 
क्यों उसके पिता पति पुत्र भेंट चढ़े
क्यों अजन्मे शिशु मरे
किसके लिये क्यों जिये 
अशोक उसे भी मार दे.

अतीत में खो गया अशोक
जब हथियाई थी सत्ता
सैकड़ों रानियों / मंत्रियों को मारा 
भाईयों को आग में झोंका 
किसी नें कुरूप कहा
उसे मौत के घाट उतारा.

साधु समुंद्र ने जगाई अंतरात्मा 
अब युद्ध नहीं प्रायश्चित होगा
अशोक ने बुद्ध का मार्ग पकड़ा
चालीस साल अहिसा की राह चला.

जूनागढ़ का गिरनार पर्वत
चट्टान पर राजाज्ञाएँ लिखी 
तेहरवीं राजाज्ञा में कबूल किया
गलत थी हत्याएँ / विस्थापन 
अमिट क्षमापत्र उकेर दिया चट्टान पर
बच्चों को लिखा अब युद्ध न हो मैदान पर
रणभेरी घोष नहीं धर्म घोष हो
दिग्विजय नहीं धर्मविजय हो
जीवन के मूल्य हैं सच्चाई दया सद्भावना
स्वनियंत्रण दान नैतिकता.

सदियों बाद भी प्रासंगिक हैं राजाज्ञाएँ
किसी की अंतरात्मा जागे 
हिंसक हवाओं के बीच क्षमा कोई माँगे 

🦉 जसबीर चावला



























अशोक का प्रायश्चित
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क्या कसूर था कलिंग का 
कलिंग गणतंत्र था
हर धर्म जाति के लोग
लोकतांत्रिक व्यवस्था
बस यही कसूर था उसका

अशोक ने युद्ध भूमी देखी
गलियों में नोचते चील गिद्ध देखे
एक लाख की मौत देखी
हर तरफ आगज़नी हाहाकार 
भागती महिलाएँ रोते बच्चे देखे 

मैदान में बिलखती वह महिला
झकझोर कर पूछती उससे
क्या दोष था उन सबका 
यह कैसा नरसंहार कैसी सत्ता 
क्यों उसके पिता पति पुत्र भेंट चढ़े
क्यों अजन्मे शिशु मरे
क्यों वह अब किसके लिये जिये 
अशोक उसे भी मार दे

याद कर हिल उठा अशोक
जब हथियाई थी सत्ता
सैकड़ों रानियों मंत्रियों को मारा 
आग में भाईयों को झोंका 
कुरूप कहने वाले को मौत के घाट उतारा 

अब प्रायश्चित होगा
साधू समुद्र ने भी जगा दी अंतरात्मा 
अब न युद्ध होगा 
अशोक ने बुद्ध का मार्ग पकड़ा
चालीस साल अहिसा की राह चला 
जूनागढ़ का गिरनार पर्वत
चट्टान पर राजाज्ञाएँ लिखी 
तेहरवीं राजाज्ञा में उसने कबूला 
गलत थी हत्याएँ विस्थापन 
अपना माफ़ीनामा उकेर दिया अमिट चट्टान पर
पुत्र प्रपौत्रों को भी लिखा युद्ध न हो मैदान पर
सद्भावना से जीतें
रणभेरी घोष नहीं धर्म घोष हो
दिग्विजय नहीं धर्मविजय हो
जीवन के मूल्य हैं सच्चाई दया 
स्वनियंत्रण दान और नैतिकता

सदियों बाद भी प्रासंगिक हैं राजाज्ञाएँ
लपलपाती हिंसक हवाओं के बीच
माफी माँगते ये हलफ़नामे

(* जूनागढ़ गुजरात में है)