Wednesday, December 30, 2015

पोतनें में दक्ष

पोतनें में दक्ष
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वे दक्ष हैं स्याही पोतनें में 
चेहरे हों
दीवार पर लगा पोस्टर
या इतिहास

🌿 जसबीर चावला 

Saturday, December 12, 2015

बेदाग

बेदाग
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सबूत का तय है भाव
सदा बरी हुए
सबूतों का अभाव

कभी रंगे हाथ नहीं पाये गये
रंग बदल दें
हाथ बदल दें
जज बदल दें
दस्तानें चढ़ाने में माहिर
दस्तानों में उँगलियों के निशान नहीं होते

दाग़दार हैं
फिर भी बेदाग हैं

☘ जसबीर चावला

अंधा कानून

अंधा कानून
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हेर फेर भी
देर भी
अंधेर भी
कानूनी कूडे का ढेर भी
अंधे के हाथ
बटेर भी

🌿 जसबीर चावला


Thursday, December 10, 2015

कैंचियों के व्यापारी

कैंचियों के व्यापारी
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पानी पर लकीर खींच दी
ऊंचे  पाये  के  मदारी  हैं

हुमा के  पर  क़तर दिये
कैंचियों  के  व्यापारी है

पोटली में  बँधा सत्तू लूटा
इनके पुरखे भी पिंडारी हैं


कहाँ गई अमन की फ़ाख्ता 
इन्होंने ही  की  बटमारी   है 

भौंकने की आजादी

भौंकने की आजादी
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एक भौंका फिर दूसरा
पास की गली से तीसरा
चौथा नुक्कड़ से
कोई टीवी अखबार पर
मोहल्ले से लेकर गाँव शहर
एक सुर में भौंकने लगे
अभिव्यक्ति की आजादी है
आजादी के नाम पर
आजादी रोकने लगे




Monday, December 7, 2015

पँछी और मतदाता

मेरे देश का मतदाता 
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सड़क किनारे
पिंजरे का पँछी बाहर आता है 
चोंच से कार्ड उठाता 
बदले में अन्न का दाना पाता है
जजमान का बँचता है भाग्य 
पँछी का तय है भाग्य 
भूल चुका अपनी उड़ान
वापस पिंजरें मे क़ैद हो जाता है
कौन है यह ?
मेरे देश का मतदाता है
5 किलो राशन मुफ़्त पाता है.





Wednesday, December 2, 2015

अब वे दबे पाँव नहीं आते

अब वे दबे पाँव नहीं आते
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अगर वे चीते से दबे पाँव आते
तुम अवाक् रह जाते
मुँह खुला रह जाता
चीख भी न पाते
अचंभे में पड जाते

वे अब ऐसे नहीं आते
बाजे गाजे के साथ आते हैं
सामनें नजर आते हैं

तुमसे छीन लिये हैं सारे अनुभव
पलक झपकते उठा ले जाते हैं