Saturday, December 12, 2015

बेदाग

बेदाग
——

सबूत का तय है भाव
सदा बरी हुए
सबूतों का अभाव

कभी रंगे हाथ नहीं पाये गये
रंग बदल दें
हाथ बदल दें
जज बदल दें
दस्तानें चढ़ाने में माहिर
दस्तानों में उँगलियों के निशान नहीं होते

दाग़दार हैं
फिर भी बेदाग हैं

☘ जसबीर चावला

No comments:

Post a Comment