Tuesday, October 25, 2016

गलाकाट स्पर्धा

गलाकाट स्पर्धा
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जेबों में राज्य 
मुट्ठी में केन्द्र
देश की 'सेलडीड' हाथ में
शाही रथ पर 'कारपोरेट' सवार
बेदख़ल व्यापारी 
'गलाकाट' स्पर्धा
मरते मज़दूर मरते किसान
अब आँख खोलो सरकार









Wednesday, October 19, 2016

चूहा बिल्ली का खेल

चूहा बिल्ली का खेल
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चूहा कहाँ खेलता है खेल
खेल में सहमति होती है
बिल्ली खेलती है खेल
बिल्ली के नियम
बिल्ली अंपायर
बिल्ली का मैदान
बिल्ली चूहे को झिंझोड़ती,छोड़ती,पकड़ती है
अंत में खेलती है मौत का खेल
सर्जिकल स्ट्राइक
देश में चल रहा चूहे बिल्ली का खेल

दिल्ली बिल्ली से कितनी मिलती है 

🌿 जसबीर चावला


Saturday, October 15, 2016

नक़ल और चुनाव संहिता

नक़ल और चुनाव संहिता
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परीक्षा में नक़ल करते टीचर ने पकड़ा
जेब से मोबाइल निकला
छात्रों फेंको पर्चियाँ
चुनाव के दिन तो रखो शुचिता
लग चुकी है आचार संहिता




Thursday, October 13, 2016

अंदर का रावण


अंदर का रावण
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झटके से मार दिया अंदर का रावण 
अब जीनें के लाले पड़ गये 
घर के बाहर जायें कैसे
जियें कैसे ?

Friday, October 7, 2016

देशद्रोही न होने की व्यथा

देशद्रोही न होनें की व्यथा
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आप पिटे नहीं अब तक
आप ट्रोल नहीं हुए
माँ बहिन की गालियाँ नहीं मिली
स्याही नहीं पुती मुँह पर
पाकिस्तानी घोषित नहीं हुए
कैसे अभागे हो
'राष्ट्रवादियों' का भंडारा कैसे चलेगा

कोरे प्रमाण पत्र पड़े हैं
आपका नाम छपे
प्रसाद में देशद्रोही का तमग़ा लगे
धमकियाँ मिलें
आपके भी दिन फिरें


☘ ज स बी र   चा व ला









Sunday, October 2, 2016

गांधी:आ अब लौट चलें - २

गांधी:आ अब लौट चलें - २
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अप्रासंगिक हुए गांधी 
लद गये दिन गांधी बाबा के 
विचार बिका
प्राण प्रतिष्ठा के पहले निष्प्राण हुआ
चौराहों पर गांधी बुत बन गये 
नाम चला / भुन चुका
गांधी जुगाड़ू नहीं अब वोट कटवा है
वैश्विकरण की अाँधी 
शोर में कौन सुनता है गाना
'पाई चवन्नी चाँदी की जय बोलो महात्मा गांधी की'
गांधी पुस्तक भंडार 
गांधी का दर्शन नहीं बिकता
बिकता है लुगदी साहित्य 
डूब गये गांधी संस्थान अपने ही भार से
महात्मा गांधी मार्ग भूल गये
अब एमजी रोड है
महात्मा गाधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज 
एमजीएम है
मान्य हो गई दादागिरी
पैरोडी बनी गांधीगिरी 

कुछ सर्वोदयी बेबस बूढ़े
आश्रम घर में अरण्य रोदन करते
गांधी की सुमरनी फेरते
तकली  चरखा चलाते 
अपने दिन गिनते
पहन बेच रहे खादी
सूत की गुंडी बनाते
गुंडों के गले डलती सूत की माला
बस ढो रहे हैं पालकी
गांधी बाबा के नाम की

गाँधी आ अब लौट चलें

गाँधी:आ अब लौट चलें - १

गाँधी:आ अब लौट चलें - १
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नया निज़ाम / नये लोग
नई मुद्रा / नये नोट
नये प्रतीक / नये बुत / नये देवता
साबरमती के नये संत
अपने चारण / अपने भाट

आँखों पट्टी बांधा राष्ट्रवाद 
लकीरों को छेड़ो / मिटाओ
गांधी मिटाओ / हटाओ
बगल में खींचो एक और लकीर
क्या कर रहा यहाँ नंगा फ़क़ीर 
इतिहास को पोतो
पोतने का इतिहास बनाओ

गाँधी आ अब लौट चलें

🌿जसबीर चावला 

Saturday, October 1, 2016

ए पार हिंदुस्तान ओ पार पाकिस्तान


ए पार हिंदुस्तान ओ पार पाकिस्तान 
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वह शख्स जो कल फूट फूट के रोया
दीवार के उस पार है
उसने बहुत कुछ खोया है

एक शख्स दीवार के इस पार हिचकियाँ ले रहा 
इसने कुछ नहीं पाया है
पता नहीं कौन इस पार है 
कौन उस पार है
बस दोनों के बीच एक दीवार है  

न दीवार होती न युद्ध होता
सरहद पर खुशबू के खेत होते
न यह रोता न वह रोता