Sunday, October 2, 2016

गाँधी:आ अब लौट चलें - १

गाँधी:आ अब लौट चलें - १
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नया निज़ाम / नये लोग
नई मुद्रा / नये नोट
नये प्रतीक / नये बुत / नये देवता
साबरमती के नये संत
अपने चारण / अपने भाट

आँखों पट्टी बांधा राष्ट्रवाद 
लकीरों को छेड़ो / मिटाओ
गांधी मिटाओ / हटाओ
बगल में खींचो एक और लकीर
क्या कर रहा यहाँ नंगा फ़क़ीर 
इतिहास को पोतो
पोतने का इतिहास बनाओ

गाँधी आ अब लौट चलें

🌿जसबीर चावला 

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