गाँधी:आ अब लौट चलें - १
""""""""""""""""""""'''''
नया निज़ाम / नये लोग
नई मुद्रा / नये नोट
नये प्रतीक / नये बुत / नये देवता
साबरमती के नये संत
अपने चारण / अपने भाट
आँखों पट्टी बांधा राष्ट्रवाद
लकीरों को छेड़ो / मिटाओ
गांधी मिटाओ / हटाओ
बगल में खींचो एक और लकीर
क्या कर रहा यहाँ नंगा फ़क़ीर
इतिहास को पोतो
पोतने का इतिहास बनाओ
गाँधी आ अब लौट चलें
🌿जसबीर चावला
No comments:
Post a Comment