Wednesday, December 29, 2021

पेटलावद विस्फोट – मौतों पर बजती तालियाँ

 पेटलावद किसी को याद है ? सब रिहा हो गये.मैंने २०१५ में जो रपट लिखी थी सच साबित हुई.९० लोगों से ज़्यादा लोग मरे.जाँच में सब आरोपी बरी.एक मालिक को छोड़कर जो विस्फोट में मारा गया.पढ़ें क्या था मामला.

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पेटलावद विस्फोट – मौतों पर बजती तालियाँ : जसबीर चावला

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मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पेटलावद क़स्बे में बस स्टेंड के पास भीड भरे स्थान पर रहवासी और व्यवसायिक क्षेत्र के एक मकान में अवैध रूप से रखे विस्फोटक जिलेटिन के भंडार में शनिवार विस्फोट हो गया. विस्फोट से ९० लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हैं जिनमें से कई की हालत गंभीर है,जिन्हे इंदौर,दाहोद आदि जगह भेजा गया.


मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को घटनास्थल का दौरा किया और सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि सरकार हायकोर्ट के किसी जज से इसकी न्यायिक जाँच करवायेगी.दोषियों को दंडित किया जायेगा. मृतकों के परिजनों को १० लाख रुपये और घायलों के इलाज का सारा खर्च सरकार करेगी और पीड़ित परिवारों के रोजगार पर भी सरकार ध्यान देगी.


✔️ ‘व्यापमं’ प्रदेश के मुख्यमंत्री जब ये घोषणायें कर रहे थे तो उनके पास खड़े उनके दल के लोग उनकी ‘भामाशाही’ घोषणाओं पर बार बार तालियाँ बजा कर स्वागत कर रहे थे.सामने दुखी और पीड़ितों का विरोध करता हुजूम था.


✔️ इस ‘विस्फोट’ से सीधे प्रश्न उठते है.मध्यप्रदेश कोई सीमावर्ती राज्य नहीं है जहाँ कोई आतंकवादी आ गया और मुठभेड़ हुई और मकान में रखे विस्फोटक सुलग उठे ना ऐसी आतंकवादी घटना है जिसमे आतंकवादी बाजार/घर / ट्रेन/बस में बम प्लांट कर देते हैं और रिमोट से या आत्मघाती तरीके से विस्फोट कर देते हैं.ऐसा कुछ नहीं था.


यहां के जैन समुदाय का एक व्यापारी (आतंकवादी की कोई जाति या धर्म नही होता,ऐसा ही लिखते हैं ना ?) जो भाजपा के स्थानीय व्यापारिक प्रकोष्ठ का पदाधिकारी था (अपराधी किसी भी राजनैतिक दल का हो सकता है ?) १० वर्षों से क़स्बे में एवं मध्य व्यवसायिक क्षेत्र में अवैध रूप से किराये के मकान में भारी मात्रा में रखे जिलेटिन डायनामाइट का भंडारण कर रहा था.


इतनें वर्षों तक पुलिस, प्रशासन सोया था जो वहाँ पर इतनी मात्रा में कुएँ /खदानों में वैध/अवैध विस्फोट के लिये जिलेटिन का भंडारण हो रहा था ?

हायकोर्ट जज द्वारा बरसों बाद लाखों करोडों रुपये बरबाद कर आई न्यायिक जाँच से क्या निष्कर्ष निकलेगा जो आज सबको मालूम नहीं है ? या पहले हुई जाँचो से अलग निष्कर्ष निकलेगा ? जाँच के अंत में यही लिखेंगे ना कि विस्फोटकों का भंडारण शहर से दूर सुरक्षित ढंग से होना चाहिये.क्या प्रशासन-पुलिस को यह पता नहीं था ? प्रशासन पुलिस की अनुशंसा पर आगरा के संबंधित विभाग की अनुशंसा से निश्चित मात्रा में विस्फोटक रखने का लायसेंस देता है जिसकी ख़रीदी / उपयोग का ब्योरा रजिस्टर में रखना होता है जिसकी प्रशासन को नियमित जाँच करना चाहिये.


जिलें में विस्फोटकों से खदानों,कुओं में वैध-अवैध तरीके से बरसों से विस्फोटकों का प्रयोग होता रहा,उस कथित भगोड़े व्यापारी का एक भाई पहले ऐसे एक विस्फोट में मारा जा चुका है,जिसे तब सिलेंडर से हुई मृत्यु बतलाया गया.कल ही उसके एक भाई के यहाँ भंडारित १०० जिलेटिन रॉड ज़ब्त हुई है.


✔️सीधे प्रश्न और उत्तर उभरते हैं.क्यों नही पुलिस-प्रशासन के तात्कालिन और वर्तमान के उन सारे सारे अफ़सरों पर जिनकी विस्फोटकों के बारें में तनिक भी जवाबदारी थी या है- को चिन्हित कर-लापरवाही से हुई मौतों का जवाबदार ठहराना चाहिये ?


यह दुर्घटना नहीं है,यह जानबूझ कर की गई या होने दी गई हत्याएँ हैं.ये आकस्मिक घटना नहीं है.चूक भी नहीं है.घोर अहंकार से उपजा प्रमाद है और बेशर्म लापरवाही है.


✔️ अगर वह व्यक्ति सिख होता तो तार खालिस्तान कमाडों फ़ोर्स या पंजाब के कट्टर आतंकवादियों से जुड जाते,मुसलमान होता तो मामला लश्कर ए तैयबा से आगे तालिबान और इस्लामिक स्टेट,सीरिया यमन तक जाता और सारे देश में टीवी पर बयानों-बहसों की बाढ़ आ जाती.मामला हिंदूओं का है अत पहले ही दिन बिना किसी जाँच के अखबारों ने भी दबी ज़बान से लिख दिया कि पुलिस इस घटना का आतंकवादी कोण नहीं मानती.राष्ट्रीय एजेंसी एनआईए भी पेटलावद पहुँच गई है जो आतंकवादी कोण की भी निश्चित जाँच करेगी.यह क्षेत्र ‘सिमी’ संगठन की कर्मभूमि रहा है तो ‘समझोता एक्सप्रेस,मालेगांव,मक्का मस्जिद हैदराबाद,अजमेर दरगाह ब्लास्ट से जुड़े ‘हिंदू राष्ट्रवादियों’ के संबंध भी इसी क्षेत्र से हैं.

विस्फोटक धर्म निरपेक्ष होते हैं

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इसके पहले भी मध्यप्रदेश में सेंघवा में ओवरलोडेड बस – जिसमें निकास का एक ही दरवाज़ा था – में बसों की आपसी प्रतिद्वंदिता में आग लगाई गई.१५ जलकर मर गये.सरकार ने बसों में दो दरवाज़ों का नियम बनाया.पन्ना में अभी फिर बस जल गई ५० लोग जिंदा जल गये.इसकी जांच चल रही हैं.बसों में दो दरवाज़े नहीं लग सके. बस मालिक जब चाहें बसों का संचालन बंद कर सरकार को धमका सकते हैं.२ वर्ष पूर्व राऊ (इंदौर) में पटाखों के अवैध भंडारण से १० से अधिक लोग जिंदा जल चुके हैं.मई १४ में १८ लोग अवैध पटाखों से नज़दीक के बडनगर में मर चुके हैं.समाचार पत्रों में आज सारे मध्यप्रदेश के ऐसे अनेकों जिलों की रपट छपी हैं जहाँ पटाखों/ विस्फोटकों के अवैध भंडारण से कई मौतें हुई हैं.

मध्य प्रदेश में मंदिरों में भीड से उपजे हादसे भी अब सनसनी या संवेदना नहीं जगाते.नियमित होने वाली घटनाएँ हैं.धाराजी,उज्जैन,दतिया,सतना,चित्रकूट आदि स्थानों पर पिछले वर्षों मे प्रशासनिक लापरवाही / निकम्मेपन से बार बार दुर्घटनाएँ हुई हैं जिनमें बहुमूल्य जीवन और माल का नुक्सान हुआ है.

मुख्यमंत्री भामाशाह बन कर अपनी सरकार और अधिकारियों की नाकामियों को छुपाकर जनता का पैसा ऐसी दुर्घटनाओं के मुआवजें में बांटते  है जिसकी पूरी जवाबदारी उनकी है.

https://kafila.online/2015/09/15/%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a6-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ab%e0%a5%8b%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0/

Saturday, December 11, 2021

सच मत बोल •🐥•कौआ काट लेगा

 


सच मत बोल •🐥•कौआ काट लेगा 

वे रोज छोड़ते है ज़हरीले साँप बस्ती में

हम ढूँढते हैं कभी सँपेरा कभी मंत्र 

कभी ओझा,ज़हरमोरा


Nick, one of the poems of Shri Jasbir Chawla ji...says SACH MAT BOL (do not tell the truth), KAUA KAT LEGA (it is a typical Hindi slang/saying that a Crow will bite you if you tell a lie...so the poet uses it that a Crow now will bite you if you tell the truth)...and then the poet says, they release poisonous snakes in the society [Ve ROZ CHHODTE HAIN ZAHRILE SAANP BASTI MEIN] ... and we are trying to find different remedies to counter the poison, such as snake-catcher, sometimes faith (Mantra-Tantra), Ojha (a witch-doctor) - to counter the poison any remedy. [HAM DHOONDHTE HAIN KABHI SANPERA, KABHI MANTRA, KABHI OJHA, ZAHARMORA)

अनुवाद:हिमांशु जसवंत्री त्रिवेदी  

Thursday, December 9, 2021

औह ! मैं तो सचमुच "नीच" हूँ

 ओह ! मैं तो सचमुच "नीच" हूँ. आप कहाँ फ़िट होते हैं 😀 😜

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✅ मैंने नीच शब्द का अंग्रेजी में मतलब जानना चाहा मेरे सामने संज्ञा और विशेषण के रूप में दर्जनों शब्द सामने आये.उन अंग्रेजी के शब्दों के हिंदी में मतलब देखे.फिर दर्जनों शब्द-अर्थ सामने आये.

✅ कम मूल्य का,धिक्कार योग्य,शरारती,दुर्जन चित्त,बुरा,तरस योग्य,मलिन अशिष्ट,बेअदब,घृणास्पद,शैतान,पिशाच,बदमाश,कापुरुष,भ्रष्ट,पाजी,पाखंडी,विधर्मी,

उपद्रवी,खल,अधम,दुष्ट,खोटा,भद्दा,असंगत,अनर्थक,बेहूदा,व्यर्थ,बुरा,नफरत पैदा करने वाला,

तिरस्कार योग्य,कुत्सित,पतित,डरपोक,ख़ुशामदी,चापलूस,पाजी,बुरा काम करने वाला

न्याय हीन,बेइंसाफ,कंजूस,दरिद्र,अकुलीन,तुच्छ,क्षुद्र,अप्रतिष्ठित,घिनोना,व्यर्थ,

बेहूदा.

✅ और भी कई अर्थ (अनर्थ 😊हैं )

✅ adjective

vile,despicable,sneaky,dishonorable,moldy,poky,miscreant,

ignemean,sneaking,sordid,shabby,reprobate,villainous,ribald,

pitiful,dirty,base,scurvy,pitchy,abject,nasty,ghoulish,

scoundrelly,picayune,shocking,unroyal,scabby,undeveloped,

paltry,plebeiannefarious,meanspirited,scummy,bass,dastardly,

hangdog,stingy,unblooded,

✅ noun

miscreant,reprobate,rascal,scoundrel,rotter,dog,pimp,

sycophant,groveller,doggerel.

Monday, August 9, 2021

दशम ग्रंथ

गुरु गोविंदसिंह द्वारा लिखित साहित्य में ‘दशमग्रंथ’ पुस्तक भी है.इसमें कई अध्याय हैं जिनमें राम,कृष्ण,दुर्गा विष्णु एवं हिंदू देवताओं पर अलग अलग अध्यायों में लिखा है.एक ‘अध्याय ‘गोविंद रामायण’ नाम से है.यह पुस्तक पूरी तरह विवादास्पद है.अलग अलग काल खण्डो में,अलग अलग स्थानों से  प्राप्त इनकी प्रतियों को लेकर कइयों के अपने अपने दावे रहे हैं.१९०२ में ३२ अलग अलग प्रतियों के आधार पर सिख समुदाय ने  इसका एक प्रमाणिक रूप तैयार किया.


 इस पुस्तक की  विषय वस्तु के अनुसार सिख समुदाय में इसे पवित्र ग्रंथ का दर्जा प्राप्त नहीं है और इसके कुछ ही हिस्सों का परायण सिख धार्मिक रूप से करते हैं. पुस्तक को लेकर तीन मत हैं.इसे गुरु गोविंद सिंह ने लिखा है,या उनके दरबारी कवियों ने रचा या इसका कुछ हिस्सा उन्होंने रचा और कुछ हिस्सा उनके कवियों ने.अधिकतर सिख तीसरे मत को मानते हैं.


गुरु गोविंदसिंह जिन्होंने ‘आदि ग्रंथ’ को ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ का दर्जा देकर गुरु प्रथा का अंत किया और पवित्र ग्रंथ को ही आगे गुरु मानने का हुकुम दिया.वे चाहते तो ‘दशम ग्रंथ’ को भी पवित्र ग्रंथ का दर्जा दे सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया,जबकि ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में उनकी वाणी नहीं है.उन्होंने अपने  पिता की वाणी को स्थान दिया,जिन्हें नौवें गुरु के श्लोक के रूप में जाना जाता है.


गुरु गोविंद सिंह ने एक और निराकार,निर्गुण ईश्वर की उपासना पद्धति को माना और दूसरी और खालसा का सृजन कर शौर्य तथा वीरता की बात की.दशमग्रंथ पुस्तक में हिंदू देवी देवताओं की उपासना और महिलाओं का ऐसा चित्रण  है जो उनकी सम्पूर्ण विचारधारा और उपासना पद्धति से मेल नहीं खाता.उनके द्वारा संपादित  ‘गुरु ग्रंथ’ को गुरु का स्थान दिया गया.गुरु ग्रंथ की अन्तर्वस्तु,विचार प्रणाली और दशम ग्रंथ पुस्तक की रचनाओं में अन्तर्विरोध है.


मुद्दा मोदीजी द्वारा अयोध्या में गुरु गोविंद सिंह द्वारा रचित कथित ‘गोविंद रामायण’ के ज़िक्र का.हिंदुत्व के अलमबरदार सिखों को हिंदुओं का ही एक पंथ मानते हैं.वे गाहे बगाहे इसका शोशा छोड़ते हैं.आरएसएस का सिख विंग ‘’राष्ट्रीय सिख संगत” भी कमोबेश इस विचार  का है.अयोध्या में मंदिर निर्माण में सिखों की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिये गोविंद रामायण का मोदीजी ने उल्लेख किया है.गुरु गोविंद सिंह का मुग़लों से संघर्ष रहा है यह बात भी उनके एजेंडे को सूट करती है.दशमग्रंथ और विवाद के बारे में और जानने के लिये लिंक दी है. -जसबीर चावला 


https://en.wikipedia.org/wiki/Dasam_Granth


https://en.wikipedia.org/wiki/History_of_Dasam_Granth


https://books.google.com/books/about/Debating_the_Dasam_Granth.html?id=qe6WnpbT2BkC

Thursday, April 8, 2021

लोकतंत्र के साइड इफ़ेक्ट

 लोकतंत्र के साइड इफ़ेक्ट 

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    कुछ गूँगों को ज़बान मिली
      कुछ ने शिष्टाचार छोड़ा
           कुछ भौंकने लगे 

किसी ने झूठ की फ़ैक्ट्री खोली
 कोई मुँह से गालियाँ दागता है
   मुखौटा चढ़ाता उतारता है

 लोकतंत्र के इन्हीं गुणों के कारण 
  कोई देश का मुखिया बनता है
    कोई पार्टी प्रवक्ता बनता है

       🦉 जसबीर चावला

Sunday, March 7, 2021

इतिहास खाद नहीं बनाता

 इतिहास खाद नहीं बनाता 

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                  फेंको ख़ूब फेंको

               जितना जी चाहे फेंको 

             सुबह शाम रात को फेंको 

          देश में फेंको विदेश में फेंको 

            धरती आसमान में फेंको

                   मुद्दे पर फेंको 

             ग़ैर मुद्दे पर ज़्यादा फेंको 

                     याद रखना 

            इतिहास खाद नहीं बनाता

कूड़े दान में पड़ा कचरा यूँ ही पड़ा रहता है

      सदियों तक सड़न पैदा करता है


             🦉 जसबीर चावला

Monday, February 22, 2021

आलकी पालकी जय ट्रम्प लाल की

 आलकी पालकी

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आलकी पालकी जय ट्रम्प लाल की 

आओ राजा भले पधारो

हम ढोयेंगे पालकी

जुहार करें हम बिछ बिछ जाएँ 

चरणों को कष्ट न हो जूती हमारी खाल की

आलकी पालकी जय ट्रम्प लाल की


Tuesday, February 9, 2021

चुप्पी

 चुप्पी

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संविधान को पलीता लगा

मैं चुप रहा

न्याय की देवी की पट्टी हटी

मैं चुप रहा

चौथा खंबा दरका 

मैं चुप रहा 

आज बंदूक़ की बट से टूटा मेरा दरवाज़ा 

चहुँओर पसरा सन्नाटा 

खिड़कियों से कोई झांक नहीं रहा 

सारा मोहल्ला चुप रहा


🦉 जसबीर चावला

Wednesday, February 3, 2021

तुम दलित हो

तुम दलित हो

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दलित हो दलित ही रहो

सदा फ़ायदे में रहो


पिछली बार मैं तुम्हारे गाँव आया

तुम्हारा टूटा घर पुतवाया

वहीं खाना खाया

तुम्हारी घरवाली को तकलीफ़ न हो

खाना सितारा होटल से बुलाया 

थालियाँ ग्लास चौकी सरकारी थे

तुम्हारी लुगाई बच्चों ने बचा खाना खाया

बरतन वहीं पर छोड़े

बोलो कितना फ़ायदा हुआ ?

(बाद में बर्तन सरपंच अपने घर ले गया)

गंदे बच्चों को नये कपड़े पहनाए  

फ़ोटो छपे

घूँघट में तुम्हारी लुगाई टीवी पर दिखी

बोलो क्या तुम कभी टीवी पर आ सकते थे ?


मैं अगली बार आया 

औरतों के पैरों को डिस्टिल वाटर से धुलवाया 

सेनिटाइज़ किया 

सरकारी परात को सुरक्षा जाँच से गुज़ारा

परात में पैर धोये

तुम सबको दे दी मुफ़्त में परात

सारी दुनिया ने देखा

बोलो कितना फ़ायदा हुआ ?


मैं फिर आऊँगा 

सड़क पर दस बीस सूखे पत्ते बिखेरूँगा 

झाड़ू से मीडिया के सामने बुहारूंगा 

तुम्हें गले लगाऊँगा 

सफ़ाई पर भाषण दूँगा

सफ़ाई युगों से आध्यात्मिक कर्म है

क्या इससे दलितों का सम्मान नहीं बढ़ेगा ?

बताओ दलित रहने में कितना है फ़ायदा ?

🦉 जसबीर चावला

Saturday, January 30, 2021

सोने से पहले


सोने से पहले

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कवि का सवाल वाजिब है

तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रही हों

तो तुम सो कैसे सकते हो * ? 

तानाशाह से यह सवाल बेमानी है

उसे कैसे नींद आ सकती है ?

उसे कई हुक्म देनें हैं सोने से पहले 

बंदूकों टैंकों से कुचलना है जन आंदोलनों को 

आज़ादी की फ़ाख्ता के पर कतरना है 

अल्पसंख्यकों को डराना है

दल में भीतरघात करवाना है 

विरोधियों का दलबदल करवाना है सोने से पहले 

गला घोंटना है प्रेस का

ताजी हवा कि वैचारिक खिड़कियाँ बंद करनी हैं

धर्म के धंधे में निवेश बढ़ाना है 

न्याय की देवी की आँखों से पट्टी नोचना है 

संविधान को ताक पर रखना है 

समाज में नफ़रत के बीज बिखेरना है

प्रजातंत्र का मुखौटा उतारना है सोने से पहले

सुबह उठकर मेहनत से फिर चढ़ाना है 

उसे ढेरों काम हैं सोने से पहले


   * सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता की पंक्तियाँ