Wednesday, February 3, 2021

तुम दलित हो

तुम दलित हो

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दलित हो दलित ही रहो

सदा फ़ायदे में रहो


पिछली बार मैं तुम्हारे गाँव आया

तुम्हारा टूटा घर पुतवाया

वहीं खाना खाया

तुम्हारी घरवाली को तकलीफ़ न हो

खाना सितारा होटल से बुलाया 

थालियाँ ग्लास चौकी सरकारी थे

तुम्हारी लुगाई बच्चों ने बचा खाना खाया

बरतन वहीं पर छोड़े

बोलो कितना फ़ायदा हुआ ?

(बाद में बर्तन सरपंच अपने घर ले गया)

गंदे बच्चों को नये कपड़े पहनाए  

फ़ोटो छपे

घूँघट में तुम्हारी लुगाई टीवी पर दिखी

बोलो क्या तुम कभी टीवी पर आ सकते थे ?


मैं अगली बार आया 

औरतों के पैरों को डिस्टिल वाटर से धुलवाया 

सेनिटाइज़ किया 

सरकारी परात को सुरक्षा जाँच से गुज़ारा

परात में पैर धोये

तुम सबको दे दी मुफ़्त में परात

सारी दुनिया ने देखा

बोलो कितना फ़ायदा हुआ ?


मैं फिर आऊँगा 

सड़क पर दस बीस सूखे पत्ते बिखेरूँगा 

झाड़ू से मीडिया के सामने बुहारूंगा 

तुम्हें गले लगाऊँगा 

सफ़ाई पर भाषण दूँगा

सफ़ाई युगों से आध्यात्मिक कर्म है

क्या इससे दलितों का सम्मान नहीं बढ़ेगा ?

बताओ दलित रहने में कितना है फ़ायदा ?

🦉 जसबीर चावला

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