Monday, March 24, 2014

तृष्णा :भाग रहे

तृष्णा : भाग रहे
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सोये हैं
कहते जाग रहे
रामायण से कुछ नहीं सीखा
स्वर्ण मृग था नहीं
पीछे भाग रहे

Sunday, March 23, 2014

शांत रहें दलबदल चालू है

शांत रहैं दलबदल चालू है 

यूँ ही कम थी रीढ की हड्डियाँ
कुछ लग गई उन्हें जो थे केंचुआ
तनते कैसे
बिना शर्म हया के रेंग रहे
इस दल से उस दल में
दलदल में पेल रहे

उनका सच है
असंतुष्ट सुकरात से संतुष्ट सूअर अच्छा है
लोकतंत्र से खो खो खेल रहे



Thursday, March 13, 2014

चुनावी दिनों में दलबदल का दांपत्य

चुनावी दिनों में दलबदल का दांम्पत्य
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चुनाव के पहले जो 'निकाह' क़ुबूल थे
तलाक तलाक में बदले
'सप्तपदी' ने गरिमा खोई
'आनंद कारज' ने मैली चादर ओढ़ी
अवैध 'मैत्री क़रार' गुजरात से चला
राजनैतिक दलों में आया
दलों के दूल्हे बेचैन बेक़रार
कहीं विवाह से पहले हनीमून हुआ
बिना रिलेशन के 'लिव इन' हुआ
गाँठे खुली नये गठबँधन बने
कई अपनें बच्चों को बारात में ले गये
कईयों के बगल बच्चे पीछे छूट गये
कहीं बाराती दूसरे दूल्हे के साथ हो लिये
रिश्तों की परिभाषा बदली
नैतिकता अपराध हुई
लोकतंत्र का क्या हुआ
चुनाव बिगड़ा दांम्पत्य हुआ

















Wednesday, March 12, 2014

राम की माया रामविलास

राम की माया रामविलास
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राम जी की कृपा
रामकृपाल रामविलास रामदास
'उदित'हो गये
'भागीरथ' प्रयत्न किया
मन मुदित हो गये

बरसों जम कर कोसा
शब्दबाण चलाये
अब 'मिठी लगे रे तेरी गारी रे'
किसी ने क्या छेड़ा
कुपित हो गये


Saturday, March 8, 2014

परहेज़

परहेज़
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न गुड़ दिया
न गुलगुले
परहेज़ करूँ
किससे.... ?