Sunday, March 23, 2014

शांत रहें दलबदल चालू है

शांत रहैं दलबदल चालू है 

यूँ ही कम थी रीढ की हड्डियाँ
कुछ लग गई उन्हें जो थे केंचुआ
तनते कैसे
बिना शर्म हया के रेंग रहे
इस दल से उस दल में
दलदल में पेल रहे

उनका सच है
असंतुष्ट सुकरात से संतुष्ट सूअर अच्छा है
लोकतंत्र से खो खो खेल रहे



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