Monday, March 25, 2019

जहा मन भय से मुक्त हो -रवीन्द्रनाथ ठाकुर





Where The Mind Is Without Fear
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Where the mind is without fear and the head is held high;
Where knowledge is free
Where the world has not been broken up into fragments
By narrow domestic walls
Where words come out from the depth of truth;
Where tireless striving stretches its arms towards perfection;
Where the clear stream of reason has not lost its way
Into the dreary desert sand of dead habit;
Where the mind is led forward by thee
Into ever-widening thought and action Into that heaven of freedom, My Father, let my country awake
जहा मन भय से मुक्त हो 
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जहाँ मन में भय न हो और सिर ऊँचा हो
जहां मुक्त ज्ञान हो
जहाँ संसार के देश संकीर्ण स्थानीय स्वार्थों की दीवारों के कारण टुकड़ों में न बँटे हों
जहाँ शब्द सत्य की गहराई से आते हों
जहाँ संपूर्णता की प्राप्ति के लिये फैली बाँहें अथक प्रयास करती हों
जहाँ मरती परंपराओं (रूढियों) के रेगिस्तान में स्पष्ट तर्क(विवेक,बुद्धी) की धारा अपना रास्ता भटकती न हो
जहाँ तेरे नेतृत्व मे मन सदैव ऊँचे विचार और उनके क्रियान्वयन में आगे बढ़े 
हे प्रभु मेर देश का उदय स्वतंत्रतता के ऐसे स्वर्ग में हो 

[ 1910 में बाँगला और 1012 अंग्रेजी में रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वार रचित 'गीताजंलि' का यह गीत देश के स्वतंत्र होनें पर प्रभु से कामना करता है कि 'मेरे देश का उदय ऐसे स्वतंत्रतता के स्वर्ग में हो जहाँ लोग स्वतंत्रचेता हों,भय मुक्त हों.समाज वैज्ञानिक द्द्ष्टिकोण रखने वाला कर्मठ हों,और देश क्षुद्र  स्थानीय स्वार्थों से परे,ज्ञान का निरंतर प्रसार करने वाला बने.
आज के रूढीवादी पोंगापंथी समाज को अगर रवीन्द्रनाथ ठाकुर आज देख पाते तो क्या लिखते.? ]

* अंग्रेजी से अनुवाद 🌿 जसबीर चावला

आप धीरे धीरे मर रहे हैं-मार्था मेडिरोस (ब्राजील की कवियत्री)

आप धीरे धीरे मर रहे हैं
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मार्था मेडिरोस -ब्राजील की कवियत्री

आप धीरे धीरे मर रहे हैं

अगर आप देशाटन नहीं करते 
अगर आप पढते नहीं 
अगर आप अपनी अंतरात्मा की आवाज़ें नहीं सुनते
अगर आप अपने उचित काम की सराहना नहीं करते 

आप धीरे धीरे मर रहे हैं

जब आप आत्म सम्मान को महसूस न कर उसे कुचल देते है
जब आप दूसरों को आपकी मदद नहीं करनें देते ( दूसरों को आपकी त्रुटियाँ ठीक नहीं करनें देते आप धीरे धीरे मर रहे हैं

अगर आप अपनी आदतों के गुलाम बन जाते हैं 
आप बनी बनाई लकीर पर रोज चलते हैं
अगर आप अपना प्रतिदिन का एक सा ढर्रा नहीं बदलते 
आप विविध रंगों के कपडे नहीं पहनते (जीवन में उल्लास के लिये विविधता नहीं लाते) 
आप अपरिचित लोगों से बात नहीं करते (ईगो पाले रखते हैं)

आप धीरे धीरे मर रहे हैं


अगर आप जुनून महसूस नहीं करते
या आपकी आँखों में चमक नहीं आती (जुनून की कल्पना मात्र से)
या आपके दिल की धड़कनें तेज नही होती (काम के प्रति उत्कंठा से)

आप धीरे धीरे मर रहे हैं.

अगर आप भविष्य की अनिश्चिताओं के प्रति कभी भी जोखिम नही लेते
अगर आप सपनों के पीछे नहीं जाते (नये सपनें नहीं देखते)
आप जीवन में एक बार भी पलायन की नहीं सोचते (बने ढाँचे से विद्रोह कर उसे त्यागनें का विचार नहीं आता)  

आप धीरे धीरे मर रहे हैं.

अपनें जीवन से प्यार करो - अपनें आप से प्यार करो
अंग्रेजी से अनुवाद : जसबीर चावला

"You start dying slowly"
This beautiful poem Titled 'Muere Lentamente' is wrongly attributed to 'Pablo Neruda' on the Web. It is the work of  Brazilian writer 'Martha Medeiros',author of numerous books and reporter for the 'Porto Alegre newspaper Zero Hora'. -JASBIR CHAWLA

Friday, March 22, 2019

होशियार बा अदब

होशियार 
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बा अदब 
बा मुलाहिजा 
होशियार
लूटने आ रहे 
चौकीदार का भेष धरे
ठग लुटेरे बटमार
जागते रहो 
होशियार


Saturday, March 16, 2019

कौन है राष्ट्रभक्त




🔴कौन है राष्ट्रभक्त 🔴
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साहब सीमा से जनाज़े आ गये हैं.
-कौन किस प्रांत का मरा है लिख देना.चुनावी सभाओं में उन्हें उसी प्रांत का सपूत बताना है.
दलित,ओबीसी भी बता देना,जाति समीकरण का भी ख्याल रखना है.
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अपनी राष्ट्रभक्ति का प्रमाण दो ?
-उसनें नीरव मोदी,विजयमाल्या के साथ लिये हुए अपनें फोटो पेश कर दिये.
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कैसे मानें की तुम सचमुच देशभक्त हो ?
-जी मैंने बिना तलाक दिये बीबी को छोड़ दिया.
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राष्ट्र प्रेम का प्रमाण पत्र दिखाओ ?
 -उसनें 'जनेऊ' दिखा दी.
तुम पास.हाँ..अब तुम बताओ ?
-उसनें 'जेएनयू' की डिग्री बता दी.
तुम फेल.तुम देशद्रोही हो.
🔵
कोई प्रमाण है कि तुम राष्ट्रभक्त हो ?
-उसनें पंतजलि के गोमूत्र का बिल दिखा दिया.
🔵
कैसे मानें कि तुम राष्ट्रभक्त हो ?
-उसनें अडानी-अंबानी की कंपनियों से ख़रीदे शेयरों की लिस्ट थमा दी.ठप्पा लगा,राष्ट्रनिर्माण में लगा देशभक्त.
🔵
क्या प्रमाण कि तुम राष्ट्रभक्त हो ?
-जी मैं भी आपके समान पूज्यनीय बापू आसाराम का भक्त हूँ.
🔵
संतरे कहाँ के मशहूर है ?
-नागपुर के.
ये लो देशभक्ति का प्रमाण पत्र

😀 जसबीर चावला

Wednesday, March 6, 2019

अपनी अपनी खुशी

अपनी अपनी खुशी
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हड्डियों के व्यापारी खुश 
जब जब सूखा पड़े 
मवेशी ज्यादा मरते हैं 
हड्डियों के ढेर सस्ते मिलते हैं

सत्ताकामी खुश
सीमा पर चले गोली 
झंडे में लिपटे ताबूत
बूथ करते हैं मज़बूत