अतीत का खंडहर है धर्म
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धर्म क्या है
हथियार है धर्म
एक ढाल ओढ़ी हुई खाल है
उन्माद धमकी दबाव फ़साद है
धारदार कैंची छद्म मुखोटा है
झूठा दिलासा लालीपॉप है धर्म
न खत्म होनें वाली चुईंग गम है
मृग तृष्णा खुलती क़लई
अतीत के खंडहर हैं
जिल्दों में बँधे मुद्रित पन्ने
कुछ सजे सँवरे पत्थर
स्वर्ण जड़ित दीवारें
गड्ड मड्ड आवाज़ें है धर्म
अपनी अपनी ढपली है धर्म
हँकने को तैयार रेवड़
भीड का भगदड़ है
धर्म का क्या कोई धर्म है ?