काग भगौड़ा ~ ~ ~ ~ ~ ~ ᒍᗩᔕᗷIᖇ ᑕᕼᗩᗯᒪᗩ
Monday, November 2, 2015
अब शर्म नहीं आती तो नहीं आती
अब शर्म नहीं आती तो नहीं आती
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लुप्त है यह चिड़ीया
ढूँढने से नहीं मिलती
इन्द्रप्रस्थ लुटियन का टीला
मोटी खाल ओढ़ चुका
लहूलुहान प्रजातंत्र
अस्मत लुटे
जनाजा उठे
अब शर्म नहीं आती तो नहीं आती
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