अब वे दबे पाँव नहीं आते
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अगर वे चीते से दबे पाँव आते
सामनें नजर आते हैं
तुम अवाक् रह जाते
मुँह खुला रह जाता
चीख भी न पाते
अचंभे में पड जाते
अचंभे में पड जाते
वे अब ऐसे नहीं आते
बाजे गाजे के साथ आते हैंसामनें नजर आते हैं
तुमसे छीन लिये हैं सारे अनुभव
पलक झपकते उठा ले जाते हैं
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