नया साल:पुराना साल
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दरवाज़े की चौखट पर नया साल खड़ा था
पीछे मुड़ कर देखा
पुराना ख़ाकी पहने पिछले दरवाज़े से बाहर निकला
छोड़ गया कड़वी यादें
गोलियों के निशान
*
आश्वस्त करे नया साल
पुराने का सहोदर न हो
देश में कुछ रंग भरे
कुछ महक बिखेरे
☘️ जसबीर चावला
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