काग भगौड़ा ~ ~ ~ ~ ~ ~ ᒍᗩᔕᗷIᖇ ᑕᕼᗩᗯᒪᗩ
Sunday, March 26, 2017
मैं सोच सकता हूँ
मैं सोच सकता हूँ
——————
मैं एक दिन तुमसे अपनी क़लम वापस छीन लूँगा
फिर बोलूँगा लिखूँगा
पुस्तकें पड़ूँगा
तुम रिमोट से चलने वाले रोबोट हो
सोच नहीं सकते
मैं सोच सकता हूँ
☘ जसबीर चावला
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment