Wednesday, May 17, 2017

इतिहास नहीं चश्मा बदलो

इतिहास नहीं चश्मा बदलो
 —————————

मैंने हजार साल के इतिहास को बुहार दिया
बादशाहों को गर्दन पकड़ निकाल दिया
स्याही पोत दी उनके हर नाम और काम पर
बाबर,हुमायूँ,अकबर,जहाँगीर,शाहजहाँ को बेकिताब किया
बहादुरशाह ज़फ़र भी हकाले गये
पन्ने फाड़े मंगोल,मुग़ल,लोधी,गुलामवँश के
ताजमहल को तेजोमहल किया
कुतुब,लाल क़िला तंबू से ढक दिया
🩸
देखा,इतिहास से खून का रिसाव रुका नहीं
हर तरफ़ तलवारों/टापों की आवाज़ थी
दक्षिण में चोल,चेर,काकितेय,राष्ट्रकूट,पँडियन,पल्लव लड़ रहे
चोल राजेन्द्र साम्राज्य को इंडोनेशिया तक ले गये
उत्तर में चंदेल,परमार,सोलंकी,प्रतिहार तलवारें भाँज रहे
कोशल,मगध की सीमा मौर्य गुप्त बड़ा रहे
बंगाल के पाल सेन लड़ रहे
राजपूत,मराठे,सिक्ख तोपें दाग रहे
दरबारों में सामंत भाई-भाई षड्यंत्रों में लिप्त दिखे
रानियाँ इन सबमें शामिल थीं 
इतिहास की हर पंक्ति खून से लथपथ थी
कौनसा धर्म था जहाँ मार काट नहीं मची थी ?
जैन बौद्ध शैव वैष्णव सब लड़ रहे
आँखें फोड़ रहे,घट्टे में सिर पीस रहे
राजाओं बादशाहों की समान लिप्सा थी
सम्राटों नवाबों की एक ही किताब थी
🩸
दुराग्रही खोल से बाहर निकलो
हूण शक यूनानी अरब सब बाहर से आये
घर बसाया इस वतन के हुए
देश की मिट्टी में मिली सबकी मिट्टी
जाने किसकी रगों में किसका खून है
जनता की बात करो
मुर्दों की नहीं मुद्दों की बात करो
🩸
इतिहास के पन्नें नहीं अपना चश्मा बदलो
वक्त बीत रहा है चश्में का नंबर बदलो

No comments:

Post a Comment