जिनके हाथों के तोते नही उड़ते
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इनके हाथों के तोते नहीं उड़ते
उड़ें कैसे
आत्मग्लानि हो
आँख में पानी हो
दिल में संवेदना हो
तो उड़ते हैं तोते
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पँख नोंच दिये तोतों के
लोकतंत्र की पीठ में भोंका ख़ंजर
मौत की कतार हो या क़तार में मौत
बुतों के चेहरों पर शिकन नहीं आती
उड़ नहीं सकेंगे परकटे तोते
इनके हाथों के कब उड़ेंगे तोते ?
☘️ ज स बी र चा व ला
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