इतिहास का परिहास
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सिकन्दर लौटा था पँजाब से वापस
इनका बिहार तक गया
भगतसिंह / राजगुरू / सुखदेव बंद थे लाहोर जेल में
इन्होंने अंडमान भेजा
आज भी तक्षशिला पाकिस्तान में है
इन्हें बिहार में मिला
इतिहास पर भारी अज्ञान
'मैं चाहूँ यह कहूँ मैं चाहे वह कहूँ मेरी मर्ज़ी'
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सिकन्दर लौटा था पँजाब से वापस
इनका बिहार तक गया
भगतसिंह / राजगुरू / सुखदेव बंद थे लाहोर जेल में
इन्होंने अंडमान भेजा
आज भी तक्षशिला पाकिस्तान में है
इन्हें बिहार में मिला
इतिहास पर भारी अज्ञान
'मैं चाहूँ यह कहूँ मैं चाहे वह कहूँ मेरी मर्ज़ी'
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