इत्तेफ़ाक़ नहीं रखता
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इत्तेफ़ाक़ नहीं रखता
तुम्हारे झँडे से
तुम्हारे डँडे से
तुम्हारी मज़हबी दास्तानों से
बाँधे जा रहे तावीज़ गंडे से
इत्तेफ़ाक़ नहीं रखता
संविधान का दम घोंटती तुम्हारी उँगलियों से
कुतरी जा रही आजादी से
'सिरफिरों' के हो रहे मुसल्सल क़त्लों से
अगला नाम लिखने वाले पंडे से
इत्तेफ़ाक़ रखता हूँ
तुम्हारे चेहरे की नक़ाब सरकने से
क़लई के खुल जानें से
सलामत रहेगा कौन कब तक
फिर भी नाइत्तेफाकी है तुम्हारे एजेंडे से
( दिवंगत पत्रकार गौरी लंकेश को समर्पित )
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