Tuesday, January 21, 2014

लघु कथा 3 : सूखा चारा और श्वेत क्रांति

सूखा चारा और श्वेत क्रांति 
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बिहार का कैमूर सिटी ग्रीन सिटी बन गया.वहाँ भवनों को भी हरे रंग से पेंट किया गया ताकि हरियाली नज़र आये.पेड़ हों या न हों पर शहर सावन के अंधे को ही नहीं,सबको सदा हरा भरा नज़र आयेगा.

प्रांत के पशु पालन मंत्री के समझदार पुत्र को इससे एक मौलिक रचनात्मक ख़्याल आया.पिता से बोला-"अपने प्रांत की गाय भैंसे इन दिनों दूध कम दें रही हैं.कारण सूखा चारा.अगर घास हरी हो तो दूध का उत्पादन बढ़ जायेगा.दूध की ‘श्वेत क्रांति’ में  'हरित क्रांति’ हो सकती है".

"पर समस्या है कि इन दिनों हरी घास मिलना मुश्किल है.हम एक काम कर सकते हैं,हम गाय भैंसों की आँखों पर प्लास्टिक के हरे चश्मे चढ़ा देते हैं,उन्हें सूखी घास हरी नज़र आयेगी,वे हरी समझ कर खाएंगी,दूध ज़्यादा देंगी - देश में फिर से दूध की नदियाँ बहेंगी"

पिता ने अपने होनहार लाल की अद्भुत समझ पर हँसकर उसे माँ  यशोदा के समान गले से लगा लिया.सचिव से कहा कि गाय भैंसों के लिये चश्मों का टेंडर कॉल करें और शाम को प्रेस कान्फरेंस का आयोजन करें ताकि लोग इस महान खोज के बारे में जान सकें.

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