अखबारों में क्लायमेंट चेंज
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अबके 'पर्यावरण दिवस' खूब गरजा
आँकड़ों की बारिश हुई
विज्ञापन की नदियाँ बहीं
हरे भरे हो गये अखबार
भाषणों की बाढ़ आई
ग्लोबल वार्मिंग की चिंता ने तटबंध तोड़ दिये
अखबारी कागज की भूख बड़ी
कुछ और पेड़ पूर्ति हेतु बलि चढ़े
☘ ज स बी र चा व ला
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