Tuesday, August 18, 2015

कबीर तुम आज पैदा होने से बच गये

कबीर तुम आज पैदा होने से बचे
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कबीर तुम पाँच सौ साल पहले हुए
आज पैदा होने से बच गये 

'बार बार के मूँडते भेड़ न बेकुंठ जाय'
'पाहन पूजे हरि मिले तो मैं पूजौं पहार'
'कंकर पत्थर जोड़ के मस्जिद लई चिनाय'
आज ऐसा लिख पाते ?
'रासुका' में जेल जाते
ब्रेकिंग न्यूज बनते 
सुर्खीयां बनते अखबारी पन्नों की
'धार्मिक भावनाओं को ठेस'
कर्फ़्यू लगवाते दंगे करवाते 
तड़ीपार होते 

तुमसे पहले कई हुए 
बुद्ध निर्वासित हुए
जापान,कोरिया,थाइलैंड जा बैठे
महावीर घिसट रहे अदालतों में 
सिख नहीं सुनते नानक की बात 
ट्रिगर पर पैग़म्बर के बंदों का हाथ
गांधी जमे ही नहीं कि धुल गये

वे सब सौम्य थे
तुम बेख़ौफ़ अक्खड़
सधुक्कड़ी भाषा 
'घर फूँक' गढ़ी मूर्तियाँ तोड़ने वाले
तुम्हें कौन सहता
कर दिया तुम्हें भी इतिहास के हाशिये
बना दिया मंदिर की मूर्ति
कौन अब 'कबीर' गाता है चोपालों पर

कबीर तुम तो बच गये आज पैदा होने से
'जसबीर' तुम्हें छोड़ेगा कौन

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