Monday, August 17, 2015

गोरैया : अब मकान भी चुप रहता है

गौरैया : अब घर भी चुप रहता है

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जब मकान थे कच्चे पक्के

घर के अंदर भी एक घर था

गोरैया का घर था

लटकी फ़ोटो / छत की संधि

पड़छत्ती गट्ठर के पीछे

उसके हिस्से का भी घर था


घर की टूटी खिड़की 

गत्ता लगाते

तो भी गौरैया घुस आती

तिनके बिखराती

माँ झाड़ू से झिड़की देती

वो उड़ जाती

बच्चे अंडे छू लेते

माँ ज़बरदस्त डाँट लगाती

कभी टूट कर गिरते अंडे

सन्नाटा छा जाता

पंखे से जो टकराती चिड़िया 

घर में मातम छा जाता

पानी पिलाते शोक मनाते

चुग्गा खाते बच्चों की चीं चीं

घर किलकता रहता

तब घर के अंदर भी घर था


अब आत्मकेंद्रित मन के मकान से

भाईचारे की तरह बेदख़ल हो गई गोरैया

याद है कब दिखी गोरैया

बेटी सी बरसों से नहीं चिंचियाई गौरेया

घर अब चुप रहता है

कहाँ है किस हाल है गौरेया ?


 ☘ जसबीर चावला


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