Wednesday, August 19, 2015

लकड़हारे कभी लौटे न थे

लकड़हारे कभी लौटे न थे

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उन्होंने सीखा है जन्मना
बस काटना फाड़ना 
आिदम प्रवृत्ति आदिम कबीले
लकडहारे हैं
टुकड़ों में बाँटना

लकड़ी नहीं को क्या
इंसानों का कहाँ है टोटा
दास बनाना बाँटना
झींगालाला हो हडिम्बा हो
राजनीतिक फ़ितरत  
ऊंची ऊंची हाँकना 




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