अरुण गोविल दीपिका चिखलिया के नाम:हे राम
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प्रिय अरुण / प्रिय दीपिका
राम राम
'रामायण' में तुम राम सीता बने
सपने में अब राम सीता नहीं आते
तुम दोनों ही नजर आते
पहले भी बुरी तरह छला गया हूँ
मुझसे छीना गया मेरा राम
सौम्य मर्यादा पुरुषोत्तम था मेरा राम
एक और जानकी लक्ष्मण
चरणों में भक्त हनुमान
हनुमान के सीने में भी सीता राम
एस.मुलगाँवकर के केलेन्डर आये
सब भगवान सेक्सी बने
देवियों ने शालीनता छोड़ी
चटख नायलोन के झीने पहने
फिर हाथ में धनुष लिये रचे गये राम
आक्रामक मुद्रा में कूच करते
जनमानस में रोपे गये
चौराहों पर कटआउट लगे
बाहर बाहर राममय हो गये
अंदर सबके राम निकल गये
छीना गया राम
छला जा रहा राम
किस छवि का याद करूँ राम
राम का वास्ता
मुझ से मेरा राम न छीनो
लौटा दो मेरा करूणामय राम
हे राम.
🦉जसबीर चावला
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