तू क्या सोचता है
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इन्हें न साँप सूंघता है
न कानों जूँ रेंगती है
हाथों तोते नहीं उड़ते
अब न ख़ून खोलता है
संसाधनों की लूट मची
चौकीदारों की साज़िश
गली गली में चोर घूमें
अब न कुत्ता भौंकता है
दूर का ढोल सुहाना था
हवाई बातें अब हवा हुई
यह ढोल फटा हुआ है
ढप्प ढप्प ही बजता है
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