Monday, August 17, 2015

तू क्या सोचता है

 तू क्या सोचता है
   ——•——

इन्हें  न साँप सूंघता है 
न  कानों  जूँ  रेंगती  है 
हाथों  तोते नहीं  उड़ते
अब न ख़ून खोलता है

संसाधनों की लूट मची                         
चौकीदारों की साज़िश 
गली गली में  चोर  घूमें                                    
अब  न कुत्ता भौंकता है

दूर का ढोल  सुहाना था
हवाई बातें अब हवा हुई 
यह  ढोल फटा  हुआ  है   
ढप्प  ढप्प  ही बजता  है


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