Tuesday, August 18, 2015

ईश्वर 'तू' भटक गया है : एक आस्तिक की डायरी से

ईश्वर भटक गया है : एक आस्तिक की डायरी से
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ईश्वर 'तू' भटक गया है
इस भीड़ में तू अकेला है
खुद रास्ता ढूँढ सके तो ढूँढ ले
दाँव पर है साख
धर्मग्रँथों और तुझमें कोई मेल नहीं
तेरे नाम पर भारी स्वाँग
ईश्वर 'तू' जमीन कब्जानें लगा
सड़कों पर 'धर्मढाबे' खुलवाने लगा
'तू' वैध है तो धर्मस्थल अवैध क्यों
तूनें बाबाओं के पाँच सितारा आश्रम देखे
तेरे बदले खुद के बुत तराश लिये
'मौन साधना' छोड़ लाउडस्पीकर पर टंग गया धर्म
धर्म का धँधा करते चेनल
गुरुद्वारों में कर्मकाँड
'खुदा' को बेचते खुदाई खिदमतदार
अल्लाह के नाम बम फट रहे
'निराकार साकार' दोनों विकृत हुए
'किताबी बेकिताबी' सब बेनक़ाब हुए

'तू' जो न सँभला मिट जायेगा
धर्म के खुले हैं 'बिग बाज़ार'
तू तो बस बाहर का 'शोकेस' है
अंदर नोट गिन रहे हैं मेनेजर


☘ ज स बी र  चा व ला

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