चौथी कसम
लड़कपन में चुपके से पढ़े
किसी की डायरी के पन्ने
ज़िक्र कई बार था क़सम खाने का
याचक आत्मग्लानि का
बार बार क़सम टूटने का
'आज फिर बीड़ी पी'
'नहीं पियूँगा अब'
ईश्वर माफ़ कर शक्ति दे
फ़िल्म 'तीसरी क़सम' देखी जवानी में
वहीदा से जुदाई
राजकपूर की तीसरी क़सम
राजकपूर की तीसरी क़सम
बैलगाड़ी में नहीं बैठायेगा नोटंकी की बाई को
मैंने ख़बरों की बदबू देख क़सम खाई
न टीवी न अख़बार पढ़ने की
रिमोट को भी छुपाया अपने आप से
सुबह पता नहीं फिर क्यों कान सचेत हो जाते
बरामदे में धम्म की अखबारी आवाज के लिये
खोया रिमोट ढूंढ लेते हाथ
झुँझलाता व्यसनी मन बदलनें लगता चेनल रोज की तरह
ईश्वर माफ़ कर शक्ति दे
इन एँकरों से मुक्ति दे
बरामदे में धम्म की अखबारी आवाज के लिये
खोया रिमोट ढूंढ लेते हाथ
झुँझलाता व्यसनी मन बदलनें लगता चेनल रोज की तरह
ईश्वर माफ़ कर शक्ति दे
इन एँकरों से मुक्ति दे
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