Monday, August 17, 2015

धर्म की मूक परंपरा



धर्मों की मूक परंपरा
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ताड़पत्रों से लेकर चिकने काग़ज़ों तक
जिल्दों में सदियों से बँधे धर्म
गंध छोड़ रहे
धर्म स्थलों पर वाचन निरंतर चालू है

संगमरमर की मूर्तियाँ
प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी चुप हैं
अपलक ताकती 
प्राण का स्पंदन नहीं

बुद्ध भी मौन हैं
सूत्र चक्र चल रहे
ओम मणि पद्मे हूँ
अत्याचार कैसा भी हो 
सन्नाटा नहीं टूटता

क्यों बज रही चर्च में घंटियाँ 
किसकी अंतिम बिदाई है
'फार हूम द बेल टॉल्स'

🦉 जसबीर चावला



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