Monday, August 17, 2015

अपना अपना सच

अपना अपना सच
'''''''''''''''''''''
गजेन्द्र क्या है
एक अवसर 
भुनाने का
बाँध गया पगड़ी 
दौसा से दिल्ली 
एक पोस्टर 
एक आरोप 
चिपकाने का

बडे भाग से टूटा फंदा 
हाथ आया मौक़ा
नहीं गवानें का
राजनीति की चौपड़ 
एक संभावना
संसद का शोर
शतरंज का मोहरा
शह और मात
इस खाने से उस खाने का

 // जसबीर चावला //

No comments:

Post a Comment