घोड़ामण्डी
'''''''''''''
घोड़ों का व्यापार
इस दौर से गुज़रा न था
बरसों से फल फूल रहा बाजार
मण्डी की हालत
कभी ऐसी तो ना थी
*
बिकने के लिये घोड़े तैयार
नये अस्तबल तैयार
चारा चंदी खानें
ख़रीदार तैयार
*
ये किसने खिंच दी
नई नैतिक लक्ष्मण रेखाएँ
कैसे आऊँ जमुना के तीर
पाँव पड़ी ज़ंजीर
*
कुर्सीयां व्याकुल
करें आर्तनाद
हाहाकार
कसमसाते कूल्हे भी बेक़रार
ईमानदारी का कैसे निकालें जनाजा
कैसे बनाएँ सरकार
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घोड़ों का व्यापार
इस दौर से गुज़रा न था
बरसों से फल फूल रहा बाजार
मण्डी की हालत
कभी ऐसी तो ना थी
*
बिकने के लिये घोड़े तैयार
नये अस्तबल तैयार
चारा चंदी खानें
ख़रीदार तैयार
*
ये किसने खिंच दी
नई नैतिक लक्ष्मण रेखाएँ
कैसे आऊँ जमुना के तीर
पाँव पड़ी ज़ंजीर
*
कुर्सीयां व्याकुल
करें आर्तनाद
हाहाकार
कसमसाते कूल्हे भी बेक़रार
ईमानदारी का कैसे निकालें जनाजा
कैसे बनाएँ सरकार
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